
– हिमांशु तिवारी रामपुर – हिन्दू धर्म की रामायण को फ़ारसी में अनुवाद किया गया था,जिससे रामायण को अच्छी समझा जा सके। अकबर बादशाह के समय रामायण का फ़ारसी में अनुवाद कराया गया था, एक रामायण रामपुर की रज़ा लायब्रेरी में है,जबकि ऐसी ही रामायण जयपुर में भी रखी है। रामपुर की लायब्रेरी में पास में ही हाथ से लिखी कुरआन भी रखी है।

आपको बता दू 1774 ईसवी में उत्तर प्रदेश के रामपुर में नबाब फैज़ुल्लाह खान ने रज़ा लायब्रेरी की स्थापना की थी। जो वर्तमान में भारत सरकार द्वारा संचालित की जा रही है। इस लायब्रेरी में तीस हज़ार से ज़्यादा पुस्तके विभिन्न भाषाओ में संगृहीत की गई है। जो इस्लामी के साथ साथ हिन्दू संस्कृति की एक धरोहर है।

अभी तक फिल्मो और किताबो में ऐसे संग्रह के वारे में पढ़ा था,लेकिन मेरे लिए वो दिन बहुत खुशनसीब था। जब मैं इस लायब्रेरी में व्लॉग बनाने के लिये गया। सच में मुझे लगा कि मैं हज़ार साल पहले की दुनिया में पहुंच गया हूँ। वहा की हर चीज़ ने मुझे रोमांचित कर दिया था ,नबाबों की शौकत,उनके राजसी ठाठ की झलक और पुराने समय में इस्तेमाल की जाने वाले हथियार और खंजरो को देख कर उस दुनिया की कल्पना में खो गया था।
मैंने जैसा रज़ा लायब्रेरी को देखा और महसूस किया, आपको भी अपने व्लॉग की वीडियो के माध्यम से रूबरू कराता हूँ। देखिये वीडियो इसका लिंक नीचे है :-
https://youtu.be/oFNzDaVWDaA
आपको मेरे व्लॉग की वीडियो कैसे लगी आप ज़रूर बताइयेगा, यह एशिया की सबसे बड़ी लायब्रेरियों में से एक है। यहां मूल्यवान संग्रह है,ऐतिहासिक पांडुलिपियाँ,मुग़ल के समय के लघु फोटो,फ़ारसी अरबी भाषाओं की किताबे मौजूद है। यहां हिंदी,उर्दू संस्कृत तमिल,तुर्की और पश्तो भाषा की दुर्लभ किताबो का खज़ाना भी मौजूद है।

भारतीय भाषाओ के ताड़पत्र और पुराने ज़माने की मूर्तिया, सिक्के और उस वक्त चला की सुराहियाँ भी मौजूद है। सबसे सुन्दर बात है इस बिल्डिंग का डिज़ाइन बेहतरीन और खुलादार है और ठंडा है। इसके भीतर हाथ से की गई नक्काशी आज भी जीवंत है। जो उस समय की बेहतर कला को दर्शाती है। इटालियन मार्बल से बनी मूर्तियों की देखकर लगेगा कि वो अभी जीवित हो उठेंगी। हालांकि इनकी उम्र सौ साल से ज़्यादा हो चुकी है। राजा लायब्रेरी के सामने ही बहुत बड़ा गार्डन और फव्वारा लगा है। जो पुरानी शानोशौकत की याद दिलाता है।

खूबसूरत गलियारे से गुज़र कर नबाबी वक्त का एहसास होता है। मेरे जीवन की रामपुर की यात्रा हमेशा यादगार रहेगी। इन लम्हो को भूला नहीं जा सकता जहाँ हमारी विरासत आज भी ज़िंदा है। मुझे रामपुर जाने का यह मौका वरिष्ठ पत्रकार,बड़े भाई और डायरेक्टर नाहिद खान की वजह से मिला। उनका बहुत आभारी रहूंगा कि उन्होंने मुझे रामपुर के नबाबो के इतिहास और एक ऐतिहासिक इमारत के दर्शन कराये।





















