| इंडिया नज़र ब्यूरो,किच्छा – उत्तराखंड में चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के बीच किच्छा क्षेत्र से एक अहम कार्रवाई सामने आई है। हल्द्वानी–बरेली मार्ग के विस्तार कार्य में बाधा बन रही ‘बेनी मजार’ को जिला प्रशासन और रेलवे विभाग की संयुक्त टीम ने सुबह तड़के हटवा दिया।
बताया जाता है कि यह मजार आजादी से पहले की बनी हुई थी और लंबे समय से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रही। यहां सभी धर्मों के लोग पहुंचकर मन्नतें मांगते थे। अधिकारियों के अनुसार, मजार का कुछ हिस्सा रेलवे और लोक निर्माण विभाग (PWD) की भूमि पर स्थित था, जिस कारण यह सड़क चौड़ीकरण में अवरोध बन रही थी।

सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई से पहले मजार प्रबंधन द्वारा इसका एक हिस्सा स्वयं हटा लिया गया था। शेष संरचना को प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
मजार को लेकर क्षेत्र में कई चर्चाये भी प्रचलित हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, अंग्रेजी हुकूमत के दौर में यहां के बाबा से जुड़ी कुछ चमत्कारी घटनाओं की कहानियां सुनने को मिलती हैं। सबसे चर्चित कहानी अंग्रेज़ो की ट्रेन रोक देने की है, हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यह स्थल लोगों की गहरी आस्था से जुड़ा रहा है।
यह भी कहा जाता है कि बाबा की कुटिया मजार के समीप जंगल में थी और उनके निधन के बाद उन्हें रेलवे लाइन के पास ही दफनाया गया था, जहां बाद में यह मजार अस्तित्व में आई।

गौरतलब है कि हल्द्वानी–बरेली मार्ग का चौड़ीकरण कार्य इन दिनों तेजी से जारी है। इससे पहले भी मार्ग में बाधा बन रहे एक काली मंदिर की मूर्तियों को विधिवत स्थानांतरित किया जा चुका है। प्रशासन का कहना है कि विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सभी अतिक्रमणों को नियमानुसार हटाया जा रहा है।
उत्तराखंड की धामी सरकार सरकारी भूमि पर बनाई अवैध मज़ारो और अन्य संरचनाओं के खिलाफ एक्शन में है। अब तक वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग एवं सड़को के किनारे बनी सैकड़ो अवैध संरचनाओं को धवस्त किया जा चुका है।




















