– न कोई पद, न राजनीतिक लालसा… फिर भी हर दर्द में सबसे आगे दिखाई देता है एक नाम – सुशील गाबा
| इंडिया नज़र ब्यूरो,
रुद्रपुर – शहर में इन दिनों एक नाम तेजी से लोगों के दिलों में अपनी जगह बना रहा है — सुशील गाबा। यह नाम किसी बड़े राजनीतिक पद या सत्ता की ताकत की वजह से नहीं, बल्कि इंसानियत और समाजसेवा के कारण चर्चा में है। शहर में जब भी कोई गरीब परिवार मुसीबत में होता है, किसी मजदूर के साथ अन्याय होता है, या आम जनता की कोई समस्या सामने आती है, वहां सबसे पहले पहुंचने वालों में सुशील गाबा का नाम शामिल होता है।
| इंडिया नज़र ब्यूरो,रुद्रपुर – शहर में इन दिनों एक नाम तेजी से लोगों के दिलों में अपनी जगह बना रहा है — सुशील गाबा। यह नाम किसी बड़े राजनीतिक पद या सत्ता की ताकत की वजह से नहीं, बल्कि इंसानियत और समाजसेवा के कारण चर्चा में है। शहर में जब भी कोई गरीब परिवार मुसीबत में होता है, किसी मजदूर के साथ अन्याय होता है, या आम जनता की कोई समस्या सामने आती है, वहां सबसे पहले पहुंचने वालों में सुशील गाबा का नाम शामिल होता है।
रुद्रपुर में लंबे समय से सक्रिय सुशील गाबा ने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत जनता के बीच रहकर की। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों में रहकर भी लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता दी, लेकिन समय के साथ उन्होंने यह महसूस किया कि समाजसेवा किसी पार्टी या झंडे की मोहताज नहीं होती। यही कारण रहा कि उन्होंने राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर बिना किसी पद और पहचान के लोगों की मदद को अपनी जिम्मेदारी बना लिया।
शहर में कई ऐसे मामले रहे हैं, जहां प्रशासनिक कार्रवाई धीमी रही लेकिन सुशील गाबा पीड़ितों की आवाज बनकर सामने आए। चाहे गैस सिलेंडर से जुड़े मामलों में आम जनता की परेशानी हो, सिडकुल में मजदूर की मौत के बाद परिवार को मुआवजा दिलाने का संघर्ष हो, या फिर क्षेत्र में बढ़ रही अवैध शराब के खिलाफ आंदोलन — हर मुद्दे पर उन्होंने खुलकर आवाज उठाई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुशील गाबा सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित समाजसेवा नहीं करते, बल्कि मौके पर पहुंचकर लोगों के साथ खड़े दिखाई देते हैं। हाल ही में रिंग रोड पर हुए दर्दनाक टुकटुक हादसे में भी जब एक गरीब चालक की मौत हुई, तब प्रशासनिक हलचल शुरू होने से पहले ही सुशील गाबा घटनास्थल और अस्पताल पहुंच गए थे। उन्होंने न केवल पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया बल्कि अधिकारियों से वार्ता कर मदद दिलाने का प्रयास भी किया।
रुद्रपुर के कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का मानना है कि आज के दौर में जहां राजनीति अक्सर आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाती है, वहीं सुशील गाबा बिना किसी प्रचार की इच्छा के लगातार लोगों की मदद कर रहे हैं। यही वजह है कि शहर का युवा वर्ग भी उन्हें एक प्रेरणा के रूप में देखने लगा है।
यही नहीं, ग्राम धौलपुर के पास नेशनल हाइवे 74 पर घुमंतु गोवंश से टकराने के बाद हाईवे पर गिरे अलखदेवा निवासी युवक पिंदर मक्कड़ को गुजरते ट्रक से रोंदने का मामला हो या कागजात दिखानें में मिनटों की देरी पर ही मोटरसाईकिल सीज करनें का मामला हो सुशिल गाबा ने विरोध दर्ज करवाया।
सुशील गाबा ने ही सबसे पहले रुद्रपुर में NEET पेपर लीक पर गंभीर सवाल उठाये और इससे शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता की खामिया पर प्रशनचिन्ह लगाया। निडर और बेबाक तरीके से उनकी मुखरता ने उन्हें सबसे अलग बना दिया है।
लोगों का कहना है कि सुशील गाबा ने यह साबित किया है कि समाजसेवा के लिए किसी बड़े पद या राजनीतिक ताकत की जरूरत नहीं होती, बल्कि जरूरत होती है एक संवेदनशील दिल और लोगों के दर्द को समझने की।
सुशील गाबा का कथन है “मेरे लिए राजनीति से पहले इंसानियत मायने रखती है। जब किसी गरीब के घर में दुख होता है, किसी मजदूर के साथ अन्याय होता है या कोई परिवार मदद के लिए दर-दर भटकता है, तो मेरा दिल खुद मुझे वहां पहुंचने के लिए मजबूर करता है। मैं किसी पद या पहचान के लिए नहीं, बल्कि लोगों के चेहरे पर उम्मीद लौटाने के लिए काम करता हूं। जब तक सांस है, जनता के बीच रहकर उनकी लड़ाई लड़ता रहूंगा।”
सुशील गाबा का कथन है “मेरे लिए राजनीति से पहले इंसानियत मायने रखती है। जब किसी गरीब के घर में दुख होता है, किसी मजदूर के साथ अन्याय होता है या कोई परिवार मदद के लिए दर-दर भटकता है, तो मेरा दिल खुद मुझे वहां पहुंचने के लिए मजबूर करता है। मैं किसी पद या पहचान के लिए नहीं, बल्कि लोगों के चेहरे पर उम्मीद लौटाने के लिए काम करता हूं। जब तक सांस है, जनता के बीच रहकर उनकी लड़ाई लड़ता रहूंगा।”



















