
– इंडिया नज़र ब्यूरो | किच्छा/सिरौली कला – किच्छा और सिरौली कला में नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस विधायक पर उच्च न्यायालय में रिट दायर कर चुनाव प्रक्रिया में बार-बार अवरोध पैदा करने का आरोप लगाया है। सिरौली कला को किच्छा से अलग करने की मांग को लेकर सिरौली के सैकड़ो लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नई मंडी किच्छा से लेकर उपजिलाधिकारी कार्यालय तक विशाल जुलूस निकाला और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम एसडीएम गौरव पांडेय को ज्ञापन भेजकर सिरौली कला को किच्छा से अलग रखते हुए दोनों स्थानों पर अलग-अलग चुनाव कराने की मांग की।

आज नई मंडी किच्छा में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। किच्छा नगर पालिका और सिरौली कला के विभिन्न वार्डों से आए लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर जोरदार नारेबाजी की। तख्तियों पर “सिरौली कला को अलग नगर पालिका बनाकर चुनाव कराओ” जैसे स्लोगन लिखे थे। इस प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने किया।
राजेश शुक्ला ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा सिरौली कला को अलग नगर पालिका का दर्जा दिए जाने के बाद कांग्रेस इसे पचा नहीं पा रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विधायक तिलक राज बेहड़ के करीबी लोगों द्वारा उच्च न्यायालय में रिट दायर कर चुनाव प्रक्रिया को उलझाया गया है।
उन्होंने कहा कि किच्छा नगर पालिका का मामला एक वर्ष से और सिरौली कला का मामला लगभग छह वर्षों से न्यायालय में लंबित है, जिससे दोनों क्षेत्रों का विकास प्रभावित हो रहा है। करोड़ों रुपये की विकास योजनाएं ठप पड़ी हैं और इसका सीधा नुकसान जनता को उठाना पड़ रहा है।

सिरौली कला के पूर्व प्रधान नासिर खान ने कहा कि जब सिरौली कला किच्छा नगर पालिका का हिस्सा था, तब क्षेत्र की उपेक्षा होती रही। अलग नगर पालिका का दर्जा मिलने से लोगों को विकास की उम्मीद जगी थी, लेकिन मामला न्यायालय में फंसे रहने से सिरौली कला को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि जनता खुद को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल होते नहीं देखना चाहती।


भाजपा नेता नाजिम मलिक ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि धामी सरकार ने सिरौली कला को नगर पालिका का दर्जा देकर और नगरीय आबादियों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू कर सराहनीय कदम उठाया है, लेकिन विपक्ष इसे स्वीकार नहीं कर पा रहा है।
प्रदर्शन के बाद राजेश शुक्ला के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी को पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि सिरौली कला को किच्छा से पृथक रखते हुए शीघ्र नगर निकाय चुनाव कराए जाएं और लंबित विकास योजनाओं को गति दी जाए।
अब देखना यह होगा कि हाई कोर्ट में लंबित इस मामले में शासन-प्रशासन क्या रुख अपनाता है। फिलहाल दोनों नगर निकायों में अलग-अलग चुनाव की मांग पर कोर्ट को निर्णय करता है इसका सभी को इंतज़ार है।






















