

रुद्रपुर – गैरसैंण विधानसभा सत्र के दूसरे दिन विधायक शिव अरोरा ने नियम 53 के तहत रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के फाजलपुर महरौला से जुड़े बेहद गंभीर मुद्दे को सदन में उठाया।
अरोरा ने कहा कि 2017 में उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के बाद से क्षेत्र में हजारों परिवार गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। न तो उनके मकानों के नक्शे पास हो पा रहे हैं, न ही भू-खण्डों की खरीद-फरोख्त हो रही है। इसके अलावा बिजली कनेक्शन और बैंक से ऋण प्राप्त करने में भी लोगों को कठिनाई झेलनी पड़ रही है।
विधायक ने सदन को अवगत कराया कि फाजलपुर महरौला में लंबे समय से हजारों परिवार रह रहे हैं। इन परिवारों ने अपने भू-खण्डों की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज, सीलिंग सर्टिफिकेट और बिजली कनेक्शन जैसी सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी कर आवास बनाए हैं, ऐसे परिवारों पर कोई कार्यवाही न की जाये। ऐसे में न्यायालय के आदेश के चलते इन परिवारों पर संकट का सामना करना पढ़ रहा है।
शिव अरोरा ने सरकार से मांग की कि जिला प्रशासन, न्याय विभाग और राजस्व विभाग इस आदेश का गहन अध्ययन करें कि क्या यह पूरा क्षेत्र आदेश की परिधि में आता है या केवल कुछ सीमित क्षेत्र, जो सीलिंग भूमि की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भूमि पर अवैध कब्जा या निर्माण पाया जाता है तो उस पर कार्यवाही हो, लेकिन वैध प्रक्रिया पूरी करने वाले परिवारों को किसी प्रकार की कार्यवाही से बचाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि मामले पर उच्च न्यायालय में मजबूती से पैरवी की जाए और साथ ही जनकल्याण को देखते हुए जरूरत पड़ने पर नियमतीकरण की नीति भी बनाई जाए, जिससे हजारों परिवारों को स्थायी राहत मिल सके।
विधायक शिव अरोरा ने स्पष्ट कहा कि यह मामला सीधे तौर पर जनता के हित से जुड़ा है और सरकार को इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए।
अरोरा ने कहा कि 2017 में उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के बाद से क्षेत्र में हजारों परिवार गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। न तो उनके मकानों के नक्शे पास हो पा रहे हैं, न ही भू-खण्डों की खरीद-फरोख्त हो रही है। इसके अलावा बिजली कनेक्शन और बैंक से ऋण प्राप्त करने में भी लोगों को कठिनाई झेलनी पड़ रही है।
विधायक ने सदन को अवगत कराया कि फाजलपुर महरौला में लंबे समय से हजारों परिवार रह रहे हैं। इन परिवारों ने अपने भू-खण्डों की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज, सीलिंग सर्टिफिकेट और बिजली कनेक्शन जैसी सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी कर आवास बनाए हैं, ऐसे परिवारों पर कोई कार्यवाही न की जाये। ऐसे में न्यायालय के आदेश के चलते इन परिवारों पर संकट का सामना करना पढ़ रहा है।
शिव अरोरा ने सरकार से मांग की कि जिला प्रशासन, न्याय विभाग और राजस्व विभाग इस आदेश का गहन अध्ययन करें कि क्या यह पूरा क्षेत्र आदेश की परिधि में आता है या केवल कुछ सीमित क्षेत्र, जो सीलिंग भूमि की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भूमि पर अवैध कब्जा या निर्माण पाया जाता है तो उस पर कार्यवाही हो, लेकिन वैध प्रक्रिया पूरी करने वाले परिवारों को किसी प्रकार की कार्यवाही से बचाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि मामले पर उच्च न्यायालय में मजबूती से पैरवी की जाए और साथ ही जनकल्याण को देखते हुए जरूरत पड़ने पर नियमतीकरण की नीति भी बनाई जाए, जिससे हजारों परिवारों को स्थायी राहत मिल सके।
विधायक शिव अरोरा ने स्पष्ट कहा कि यह मामला सीधे तौर पर जनता के हित से जुड़ा है और सरकार को इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए।























