– गेहूं, मसूर, चना समेत विभिन्न फसलों के फाउंडेशन बीज का होगा उत्पादन | बीज उत्पादन के पुराने संबंधों को पुनर्जीवित करने की पहल
– इंडिया नज़र ब्यूरो | पंतनगर – गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर ने उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम के साथ अपने पुराने बीज उत्पादन संबंधों को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। देहरादून में 6 अगस्त 2026 को आयोजित उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम की बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया कि विभिन्न फसलों की संस्तुत प्रजातियों के आधारीय (फाउंडेशन) बीज का उत्पादन विश्वविद्यालय द्वारा कर निगम को उपलब्ध कराया जाएगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डा.) शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने बताया कि पंतनगर विश्वविद्यालय की पहचान देश-विदेश में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए रही है। इसी पहचान को और मजबूत करने के उद्देश्य से आगामी रबी सीजन में गेहूं की पहाड़ी एवं मैदानी क्षेत्रों के लिए संस्तुत प्रजातियों के बीज उत्पादन का 25 प्रतिशत विश्वविद्यालय द्वारा उत्पादित कर उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम को उपलब्ध कराया जाएगा।
123 हेक्टेयर में होगा विभिन्न फसलों के बीज का उत्पादन
योजना के तहत विश्वविद्यालय द्वारा 86 हेक्टेयर में गेहूं, 25 हेक्टेयर में मसूर, 2 हेक्टेयर में चना तथा 10 हेक्टेयर में अन्य फसलों के आधारीय बीज का उत्पादन किया जाएगा। तैयार बीज उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम को उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, अंशधारी किसानों की सहभागिता निगम के साथ बीज उत्पादन में पूर्ववत बनी रहेगी।
कुलपति ने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न फसलों की प्रजातियों का लगभग 7,000 कुंतल प्रजनक बीज प्रतिवर्ष उत्पादित किया जा रहा है। इस बीज का उपयोग देश के कई राज्यों में किया जा रहा है।
पंतनगर को फिर बड़े बीज उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य
प्रो. कश्यप ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य पंतनगर विश्वविद्यालय और उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम के बीच बीज उत्पादन एवं आपूर्ति के पुराने मॉडल को पुनर्जीवित करना है। साथ ही पंतनगर को एक बार फिर बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
उन्होंने बताया कि राज्य की विभिन्न फसलों के बीज एवं पौध सामग्री की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्रों और फार्म के अधिकारियों के साथ दो चरणों में विचार-विमर्श किया जा चुका है। इसके आधार पर आवश्यक रणनीति तैयार की जा रही है।
कुलपति ने कहा कि उत्तराखण्ड बीज एवं तराई विकास निगम के सुदृढ़ीकरण के लिए विश्वविद्यालय हरसंभव सहयोग करेगा। राज्य की बीज एवं पौध सामग्री की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
शैक्षणिक सत्र की प्रवेश प्रक्रिया लगभग पूरी
कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। विभिन्न पाठ्यक्रमों में रिक्त सीटों को भरने के लिए शीघ्र ही स्पॉट राउंड आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 18 अगस्त से विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालयों में नियमित कक्षाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के माध्यम से प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को भी शीघ्र विश्वविद्यालय में शामिल किया जाएगा।
करीब एक हजार विद्यार्थियों के लिए ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम
नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय में 15 दिवसीय ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें लगभग 1,000 प्रथम वर्ष के विद्यार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों, प्रयोगशालाओं और अन्य सुविधाओं से परिचित कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी देने के साथ-साथ उनके चार वर्षीय शैक्षणिक जीवन और भविष्य के करियर के लिए बेहतर दिशा प्रदान करना है।
पत्रकार वार्ता का संचालन निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल ने किया। इस अवसर पर सहायक निदेशक संचार डा. अर्पिता काण्डपाल सहित प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि मौजूद रहे।




















