
– इंडिया नज़र ब्यूरोकिच्छा – उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर पहाड़ी बनाम मैदानी पहचान की बहस में उलझती दिख रही है। किच्छा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खानपुर (हरिद्वार) से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने एक तीखा और विवादित बयान देते हुए कहा कि “हमसे जूता रखकर कोई ‘जय उत्तराखंड’ नहीं बुलवा सकता।” उनके इस बयान ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और विधानसभा में हाल ही में हुई टिप्पणी को लेकर विवाद और बढ़ गया है।

उन्होंने ”विधानसभा के होने वाले परिसीमन पर भी आबादी के आधार पर करने की वकालत की और यदि इसे क्षेत्रफल के आधार पर किया गया तो इसका कडा विरोध किया जायेगा।”
उमेश कुमार ने स्पष्ट कहा कि ”उत्तराखंड की जनता का आपस में बांटने का कोई भी प्रयास राज्य के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में 50 से 70 लाख तक उत्तराखंडी बसते हैं, लेकिन कहीं भी उनके साथ भेदभाव नहीं हुआ। फिर उत्तराखंड के अंदर पहाड़–मैदान के नाम पर भेदभाव कैसे स्वीकार किया जा सकता है ?”

विधायक ने मैदानी लोगो के बाहरी कहने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि जो लोग सालों से उत्तराखंड में रह रहे हैं, वह भी इस राज्य की पहचान और संस्कृति का हिस्सा हैं, उन्हें ‘बाहरी’ कहना गलत है।
उमेश कुमार ने लोकसभा और विधानसभा के पुनर्सीमन के वारे में कहा कि सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्रफल आधारित परिसीमन को “अनुचित” बताया और कहा कि इससे प्रतिनिधित्व असंतुलित हो सकता है। आगामी परसीमन पर इसका ध्यान रखा जायेगा।
हमेशा चर्चा और विवाद में रहने वाले विधायक उमेश कुमार अपने निजी हेलीकॉप्टर से चीनी मिल ग्राउंड पहुंचे थे। इसके बाद उनकी गाड़ियों का काफिला पूरे नगर से होकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचा था। उनकी यह भव्य एंट्री और फिर मंच से दिया गया तीखा भाषण पूरे कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।
“पचास–सत्तर लाख उत्तराखंडी बाहर रह रहे हैं, उनके साथ कभी कोई भेदभाव नहीं हुआ, लेकिन पहाड़–मैदान की राजनीति शुरू कर दी गई है। हमसे जूता रखकर कोई ‘जय उत्तराखंड’ नहीं बुलवा सकता। यह हमारे स्वाभिमान पर चोट है।” उमेश कुमार का यह बयान उत्तराखंड की राजनीति में एक नई बहस छेड़ चुका है।सवाल यह है कि क्या यह विवाद राज्य की अस्मिता का मुद्दा बनेगा, या फिर राजनीतिक बयानबाज़ी का हिस्सा बनकर ही सिमट जाएगा ? अब देखना है सत्ता पक्ष और विपक्ष इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है।






















