
किच्छा – जैसे-जैसे जिला पंचायत सदस्य चुनाव की तिथि करीब आ रही है, वैसे-वैसे जिले भर में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। खासकर, वार्ड नंबर 17 – भंगा सीट – को लेकर राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त चर्चा है। यह सीट इस बार सबसे चर्चित और ‘हॉट सीट’ मानी जा रही है। कारण है – निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू गंगवार की दोबारा दावेदारी, जो कि अपने सशक्त कार्यकाल और परिवारिक राजनीतिक विरासत के चलते फिर से इतिहास रच सकती है।
रेनू गंगवार न सिर्फ एक अनुभवी नेता हैं, बल्कि उन्होंने अपने कार्यकाल में भंगा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में विकास की नई मिसाल कायम की है। उनका कहना है “मैंने अपनी सास श्रीमती सुशीला गंगवार (जो दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं) और ससुर श्री ईश्वरी प्रसाद गंगवार (जो एक बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहे) से नेतृत्व और जनसेवा की प्रेरणा ली है। मैंने अपने कार्यकाल में जनता की ज़रूरतों को सबसे ऊपर रखा है और यथासंभव हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाई है।”
रेनू गंगवार का कहना है कि उनके कार्यकाल की कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं: सड़कों और पुलियो का निर्माण, कई गाँवों में जर्जर सड़कों का पुर्ननिर्माण, नए संपर्क मार्गों का निर्माण। शौचालयों और फर्नीचर की व्यवस्था। हैंडपंप, व्यवस्था से जल संकट से जूझते गाँवों को राहत। जनता से सीधे संवाद, और कई विकास कार्यों की निगरानी स्वयं गांव जाकर निरीक्षण किया।

रेनू गंगवार के पति सुरेश गंगवार जो उनके चुनाव की बागडोर संभाल रहे है। उनका कहना है कि ”हम सिर्फ मुद्दों और विकास की बात कर रहे है, हमारा वीज़न साफ़ है कि हम क्षेत्र में विकास करेंगे। लोगो को स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत जान समस्याओ का समाधान करायेंगे .हमारे परिवार ने पिछले बीस सालो से क्षेत्र की सेवा की है। जिसका फल हमे इस बार भी आशीर्वाद के रूप में मिलेगा।”

हालांकि, चुनावी मुकाबले में भाजपा से शिवांगी गंगवार और कांग्रेस की ओर से बुशरा मलिक भी मैदान में हैं। दोनों ही युवा और उत्साही प्रत्याशी हैं, जो जातीय और राजनीतिक समीकरणों पर जोर दे रही हैं। विशेषकर मुस्लिम वोट बैंक (जो क्षेत्र की आबादी का 50% से अधिक है) को अपने पक्ष में करने की कोशिश हो रही है।
लेकिन जानकारों की मानें तो सिर्फ जातीय समीकरण ही नहीं, विकास और प्रत्याशी की सुलभता इस बार निर्णायक साबित होगी।
भंगा सीट के मतदाता क्या चाहते हैं ? इस सीट पर करीब 24,000 मतदाता हैं। इनमें मुस्लिम समुदाय, कुर्मी, राठौर, दलित, सिख और अन्य जातियाँ शामिल हैं। जब ‘इंडिया नज़र’ की टीम ने क्षेत्र के गांवों में जाकर लोगों से बात की, तो अधिकांश का मत एक ही था – “हमें ऐसा नेता चाहिए जो हमारी समस्याएं सुने और हमारे पास रहे।” रेनू गंगवार का निवास क्षेत्र से निकट है, जिससे वे लगातार क्षेत्र के संपर्क में रहती हैं और इसी नजदीकी को जनता उनकी ताकत मान रही है।
धार्मिक मुद्दों की साजिश पर भी मतदाताओं की सजगता – हालांकि कुछ असामाजिक तत्व चुनाव को धार्मिक मुद्दों की ओर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश मतदाता इस बार समझदारी और विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। भंगा की जनता अब जाति और धर्म की राजनीति से आगे बढ़कर काम और कर्तव्य पर वोट करना चाहती है।
क्या इतिहास फिर से खुद को दोहराएगा ?
रेनू गंगवार अगर इस बार भी जीतती हैं, तो वे और उनकी सास सुशीला गंगवार – दोनों मिलकर जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर दो-दो बार काबिज होने वाली प्रदेश की विरली राजनीतिक जोड़ी बन जाएंगी। यह न केवल परिवार के लिए, बल्कि भंगा क्षेत्र के लिए भी एक गर्व की बात होगी। भंगा सीट पर इस बार का चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि विकास बनाम वादों की परीक्षा है। अब देखना यह है कि मतदाता किसे आशीर्वाद देते हैं – पुराने और अनुभवी नेतृत्व को, या नई ऊर्जा और वादों को ?
























