
– नीरज कुमार
धारचूला/नेपाल सीमा – उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला के जुम्मा गॉव में बीती रात आसमानी आफत यानी बादल फटने से सात मकान पूरी तरह ज़मीदोज़ हो गये। अभी तक पांच शव बरामद हुए है। इनमे से योगा सिंह की तीन बेटिया ज़िंदा दफ़न हो गई थी। रास्ते बंद होने से बचाव और राहत कार्य के लिये हेलीकाप्टर सेवा की मदद लेनी पड़ी है। तीन लापता लोगो की खोजबीन की जा रही है।

पहाड़ में अतिबृष्टि से बादल फटने की घटनाये बढ़ती जा रही है,बीते रात को जब जुम्मा गॉव के लोग अपने घरो में सोये हुए थे कि अचानक बादल फटने की घटना घटित हो गई। हादसे का शिकार हुए लोगो को भागने का मौका भी नहीं मिला। अभी भी कई लोग लापता है। घरो में मलवा भरा पड़ा है। यहां का मंज़र बहुत ही भयावह है।
हालांकि मौके पर एचडीआरएफ,एसडीआरएफ पुलिस और आपदा प्रबंधन के कर्मचारी बचाव और राहत के कार्यो में जुटे हुए है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद बचाव और राहत कार्यो पर नज़र रखे हुए है।


वही दूसरी घटना धारचूला से सटे नेपाल के श्री बगड़ इलाके में हुई है। वहा भी बीती रात बादल फटा था। जिसके चलते हैं नेपाल मैं भी 15 से 20 लोगों के लापता होने की खबर आ रही है। जिसकी अभी कोईं पुष्टि नहीं हुई है।
लेकिन नेपाल क्षेत्र की सीमा से आये मलबे और पानी से धारचूला के तपोवन में बने 280 मेगावाट की धोली गंगा जल विधुत परियोजना एनएचपीसी कॉलोनी को काफी नुक्सान पहुंचा है। यहां बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए है। नदी का मलबा और पानी कॉलोनी के घरों में घुस गया है। जिससे कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गये है। कालोनी के लोगो ने किसी तरह रात गुज़ारी अब प्रशासन द्वारा इस इलाके में रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया है। धारचूला के तपोवन में काली नदी के पानी से झील बन गई है जिसकी वजह से धारचूला कस्बे को खतरा पैदा हो गया है।

जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान का कहना है कि अभी इस आपदा के नुक्सान का आकलन किया जा रहा है। पीड़ित लोगो को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। उनको तत्काल राहत पहुंचाई गई है।





















