– विक्की रस्तोगी
नई दिल्ली – देश इस साल आज़ादी की 75 वी सालगिरह मनाने की तैयारी करने में जुटा हुआ है। वही सुप्रीम कोर्ट आने वाले कुछ ही दिनों में एक ऐसा ऐतिहासिक फ़ैसला सुना सकती है, जो दागी नेताओं और मंत्रिओं की रातों की नींद हराम कर सकता है।
हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है। जहां हमें, अपनी इच्छा अनुसार, चुनाव के दौरान उम्मीदवार को चुनने की आज़ादी होती है। लेकिन पूरे देश में ख़ास तौर से बंगाल और बिहार के चुनाव के दौरान, बूथ कैप्चरिंग, हिंसा और बमबाजी की घटना अक्सर सुनने को मिलती है। यहां तक की हत्या भी की जाती है।
इन सब के पीछे की मुख्य वजह, राजनीति में घुसे क्रिमिनल लोग है। जिनपर रंगदारी, हत्या और बलात्कार जैसे संगीन आरोप लगे होते है, लेकिन बावजूद इसके वो चुनाव में खड़े भी होते है, जीतते भी और मंत्री तक भी बन जाते है।
पिछले साल ही, बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए 243 सीटों के लिए 470 उम्मीदवारों ने अर्जी दी, जिसमें से सभी के सभी दागी थे।
यह एक बहुत गंभीर समस्या है, क्योंकि इन्हीं दागिओं के हाथों में हमारे राज्य और देश की जिम्मेदारी होती है। काफ़ी लम्बे समय से सुप्रीम कोर्ट में इन दागी नेताओं को राजनीती से दूर करने के लिए, काफ़ी ज़्यादा बहस भी होती रही है, लेकिन कभी भी कोई कठोर फैसला नहीं सुनाया गया।
लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख सख़्त कर लिया है। जहां कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह सख्त हिदायत दी है कि जितने भी दागी नेता है, उन सबके नाम आयोग अपनी वेबसाइट और अखबारों में सार्वजनिक करें।
फिलहाल अभी तक फ़ैसले की तारीख़ तय नहीं की गयी है। लेकिन अगर इस काम को पूरी ईमानदारी और सख़्ती के साथ किया जाये तो शायद आने वाले दिनों में हमें राजनीति में सच्चे, ईमानदार और प्रयत्नशील लोग नज़र आएंगे, जो देश को प्रगतिशील बनाने के लिए, निस्वार्थ भाव से कार्य करेंगे।





















