
– इंडिया नज़र ब्यूरो
देहरादून – विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले उत्तराखंड राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की घोषणा कर भाजपा ने अपनी हार कबूल कर ली है। नेतृत्व परिवर्तन से भाजपा अपनी नाकामी छिपा नहीं सकती है। भाजपा में चल रहा अंतर्द्वंद अब सबके सामने है। यह निर्णय लेकर उन्होंने प्रमाणित कर दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त भाजपा सरकार निष्क्रिय, निकम्मी और जनविरोधी रही है। त्रिवेंद्र सरकार में केवल अफसरशाही हावी रही और भ्रष्टाचार में लिप्त रही । उनके कार्यकाल में क्षेत्रवाद को बढ़ावा दिया गया और कोरोना महामारी से निपटने में भी उन्होंने ढिलाई बरती। जनप्रतिनिधियों को किसी भी निर्णय से पहले विश्वास में नहीं लिया गया, जिस कारण मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को रुक्सत होना पड़ा।
यह विचार उत्तराखंड प्रदेश किसान कांग्रेस कमेटी प्रदेश महासचिव वरुण प्रताप सिंह भाकुनी ने व्यक्त किये। उन्होंने कटाक्ष करते कि चार साल पूरे होने पर जश्न की तैयारी में डूबी सरकार अब खुद संकट में आ चुकी है। तीरथ सिंह रावत को नया मुख्यमंत्री बनाने से भारतीय जनता पार्टी को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। यह कवायद सिर्फ सरकार की नाकामी पर पर्दा डालने के लिए की गई है।
श्री भाकुनी ने कहा कि चार वर्षों से जो सरकार कुछ ना कर पाई एक साल के अल्प समय में क्या नया कर लेगी ? प्रदेश में बेरोजगारी अपने चरम पर है और पूरे देश में उत्तराखंड ने बेरोजगारी में नया रिकॉर्ड बनाया है। उत्तराखंड में शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में 4 सालों में भाजपा सरकार द्वारा कोई विशेष कार्य नहीं किए गए। केंद्र और प्रदेश की सरकारें महंगाई पर रोक लगाने में नाकाम रही। पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस के बढ़ते दामों ने आम आदमी का बजट बिगाड़ कर रख दिया है।
उन्होंने कहा कि आम जन दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहा हैं। किसान खेतों की बजाए सड़कों पर अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। आज जनता बड़ी बेसब्री से कांग्रेस की ओर देख रही है और प्रदेश में परिवर्तन लाना चाहती है। मुख्यमंत्री बदलना यह साबित करता है कि जनता भाजपा को पूरी तरह खारिज कर चुकी है। आने वाला समय निश्चित रूप से कांग्रेस का होगा। भाजपा पुनः सत्ता में आने के सपने देखना छोड़ दे।






















