– इंडिया नजर ब्यूरो | किच्छा – मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया के बीच किच्छा में सियासी पारा चढ़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनयू खान के नाम पर दर्ज आपत्ति की सुनवाई में शिकायतकर्ता के ही न पहुंचने से अब पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। एनयू खान ने इसे आधारहीन आपत्तियों के जरिए मतदाताओं को परेशान करने का मामला बताते हुए प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों से ऐसे मामलों की जांच की मांग की है।
सिरौली कला में गुरुवार को हुई सुनवाई में एनयू खान अपने दस्तावेजों के साथ पहुंचे, लेकिन जिस व्यक्ति ने उनके नाम पर आपत्ति दर्ज कराई थी, वह सुनवाई में दिखाई ही नहीं दिया। आपत्ति में दावा किया गया था कि एनयू खान किच्छा से स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं और अब यहां निवास नहीं करते। शिकायत के बाद एनयू खान को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होकर अपने निवास और मतदाता सूची में नाम से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़े।

एनयू खान के मुताबिक, आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति का नाम कैलाश बताया गया था। वह निर्धारित स्थान पर समय से पहुंचे और काफी देर तक शिकायतकर्ता का इंतजार करते रहे। लेकिन शिकायतकर्ता न तो सुनवाई में पहुंचा और न ही अपनी आपत्ति के समर्थन में कोई दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत किया। इसके बाद एनयू खान द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आपत्ति का निस्तारण कर दिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद एनयू खान ने सीधे सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी मतदाता के खिलाफ आपत्ति दर्ज की जाती है तो शिकायतकर्ता की भी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह सुनवाई में उपस्थित होकर अपनी शिकायत के समर्थन में ठोस प्रमाण दे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर शिकायतकर्ता के पास आरोप के समर्थन में कोई सबूत था तो वह सुनवाई में सामने क्यों नहीं आया? एनयू खान ने कहा कि ऐसी स्थिति में यह जांच का विषय बनता है कि आपत्ति किस आधार पर दर्ज की गई और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या थी।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में गरीब, मजदूर और आम परिवारों के लोग अपनी रोजमर्रा की मजदूरी छोड़कर घंटों कतार में खड़े होकर अपने निवास और पहचान के दस्तावेज दिखाने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, किसी व्यक्ति के नाम पर आपत्ति लगाने वाला ही सुनवाई में नहीं पहुंचता, तो इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
एनयू खान ने कहा कि एक आधारहीन आपत्ति का असर केवल संबंधित मतदाता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसे सुनने में अधिकारियों और कर्मचारियों का समय भी खर्च होता है और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल होता है। एनयू खान ने प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों से मांग की कि एसआईआर के दौरान दर्ज की जा रही आपत्तियों की भी गंभीरता से जांच की जाए।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक संवेदनशील और लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। इसे किसी राजनीतिक दबाव, व्यक्तिगत रंजिश या किसी मतदाता को परेशान करने का माध्यम नहीं बनने दिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर आपत्ति दर्ज कराई है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
एसआईआर की सुनवाई के बीच सामने आए इस मामले ने किच्छा की राजनीति में एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। एनयू खान का कहना है कि एक तरफ मतदाताओं से दस्तावेजों के ढेर मांगे जा रहे हैं, दूसरी तरफ बिना ठोस आधार के आपत्तियां दर्ज कराने वालों की जवाबदेही तय नहीं हो रही।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या एसआईआर के तहत दर्ज होने वाली प्रत्येक आपत्ति की विश्वसनीयता की जांच होगी? क्या शिकायतकर्ता की मौजूदगी और उसके साक्ष्य को भी अनिवार्य बनाया जाएगा? और यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत आपत्ति लगाता पाया जाता है तो क्या उसके खिलाफ कार्रवाई होगी?
एनयू खान के मामले में आपत्ति का निस्तारण हो चुका है, लेकिन इस घटनाक्रम ने एसआईआर की प्रक्रिया में दर्ज आपत्तियों की मंशा और शिकायतकर्ताओं की जवाबदेही पर नई बहस जरूर छेड़ दी है।




















