


| इंडिया नज़र ब्यूरो रुद्रपुर – निजी स्कूलों की बस एवं वैन परिवहन शुल्क में हुई भारी बढ़ोतरी को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस संबंध में अभिभावक सुशील गाबा द्वारा राज्य परिवहन प्राधिकरण, उत्तराखंड को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया है, जिसमें हाल ही में बढ़ाए गए परिवहन शुल्क को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई है।
ज्ञापन में बताया गया है कि 25 मार्च 2026 को आयोजित बैठक में निजी स्कूलों के छात्रों के लिए मासिक परिवहन शुल्क 2200 से बढ़ाकर 3700 तक निर्धारित कर दिया गया है। अभिभावकों का कहना है कि पहले से ही महंगी होती शिक्षा व्यवस्था, जैसे स्कूल फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और ट्यूशन के कारण आर्थिक बोझ काफी बढ़ चुका है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट फीस में यह बढ़ोतरी आम परिवारों के लिए एक बड़ा झटका साबित होगी।

अभिभावकों ने यह भी आशंका जताई है कि राज्य परिवहन प्राधिकरण के आदेश का हवाला देकर निजी स्कूल एसोसिएशन एकजुट होकर शुल्क वृद्धि लागू कर सकते हैं, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग के अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। ज्ञापन के माध्यम से अभिभावकों ने मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस आदेश को तुरंत निरस्त किया जाए, अन्यथा वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता सुशील गाबा का कहना है कि “आज के समय में बच्चों की पढ़ाई पहले ही बहुत महंगी हो चुकी है। किताबों, ड्रेस और ट्यूशन के खर्च के बाद अब ट्रांसपोर्ट फीस में इतनी भारी बढ़ोतरी करना पूरी तरह से अनुचित है। यह फैसला सीधे तौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालने वाला है। हम सरकार से मांग करते हैं कि इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा अभिभावक सड़क पर उतरकर विरोध करने को मजबूर होंगे।”






















