



– इंडिया नज़र ब्यूरो देहरादून – उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्यपाल ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक को मंज़ूरी दे दी है, जिसके बाद राज्य में संचालित मदरसा बोर्ड को अब समाप्त कर दिया जाएगा। इस विधेयक के लागू होने के साथ ही प्रदेश के सभी मदरसों को अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी। साथ ही, उन्हें उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्धता लेनी होगी।

राज्य सरकार का यह कदम प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता और एकीकृत प्रणाली की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलेगी और उन्हें समान अवसर मिलेंगे।
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा,“यह ऐतिहासिक कदम है जो मदरसों की दशा और दिशा दोनों बदल देगा। अब मदरसे के बच्चे सीमित दायरे में नहीं रहेंगे, बल्कि खुले आसमान में उड़ान भरेंगे। इन्हीं मदरसों से निकलने वाले बच्चे भविष्य में अब्दुल कलाम, डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस बनेंगे। सरकार का यह फैसला अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।”
सरकार का मानना है कि ”इस विधेयक से मदरसों में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों बढ़ेगी। अब सभी संस्थानों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ते हुए विज्ञान, गणित, सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों पर भी समान रूप से जोर देना होगा।”
उत्तराखंड सरकार का यह कदम शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मदरसा बोर्ड के समाप्त होने के बाद अब प्रदेश में शिक्षा की एक समान और सशक्त व्यवस्था लागू होगी, जिससे अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को भी मुख्यधारा में आगे बढ़ने के अधिक अवसर प्राप्त होंगे।





















