
– अज़हर मलिककाशीपुर – जब जिम्मेदार प्रशासन के अधिकारी आश्वासन की माला जपते हैं, अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देते हैं। ऐसे में किसी न किसी को आगे आगे आकर मसीहा बनना ही पड़ता है ऐसा ही कुछ एनजीओ के सदस्य और पुलिस की टीम ने मिलकर किया। जिन्होंने इंसानी जिंदगी के साथ साथ जानवरों की जिंदगी बचाने की एक अनोखी पहल का शुभारंभ किया है।
काशीपुर की सड़कों पर इन दिनों चलना किसी जोखिम से कम नहीं,क्योंकि काशीपुर की सड़कों पर आवारा जानवरों ने अपना कब्जा जमा रखा है। जो कभी सड़कों पर आपस में दंगल करते हुए दूसरों को चोटिल करते हुए आराम से देखे जा सकते है। तो कभी सड़कों पर बीच में बैठकर देर रात्रि दुर्घटनाओं को अंजाम देते हुऐ। लंबे समय जिम्मेदार प्रशासन के अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद भी प्रशासन ने आवारा जानवरों से निजात दिलाने के लिए कोई भी कवायद शुरू नहीं की सिवाय आश्वासन देने।

यही वजह है कि अधिकारियों की लापरवाही के चलते दुर्घटनाओं का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था। जिसके चलते ख्वाहिश नाम के एनजीओ के सदस्य और पुलिस की टीम सराहनीय पहल को अंजाम दे रहे हैं। जिसमें सड़क पर घूम रहे हैं जानवरों को रेडियम बेल्ट पहनाकर सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में कमी लाने का प्रयास कर रहे हैं। लावारिस आवारा जानवरों के गले में ‘रेडियम बेल्ट’ पहनाए जा रही हैं जो कि अंधेरे में भी रोशनी पड़ते ही चमक उठते हैं। और समय रहते वाहन चालक वाहन को नियंत्रित कर लेता है। टीम सदस्यों की मानो तो इससे रात में सड़क पर बैठे लावरिस जानवर दूर से ही दिख जाएंगे और सड़क हादसों पर लगाम लगेगा. इस पहल से लावारिस जानवरों की भी जान बचेगी.
लावारिस आवारा जानवरों की समस्या स्थानीय लोगों को काफी लंबे समय से है। जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी आवारा जानवरों से निजात अब तक नहीं मिली। काशीपुर नगर निगम में नई नियुक्त नगर आयुक्त आकांक्षा वर्मा आवारा जानवरों से निजात दिलाने की कवायत में जुट गई हैं। लावारिस आवारा जानवरों को रखने के लिए जगह की तलाश की जा रही है। फिलहाल दुर्घटना में घायल हुए जानवरों के इलाज के लिए टीम गठित कर दी गई है।
फिलहाल इंसानों से जानवरो बचाने की पहल तो एनजीओ और पुलिस ने एक साथ कर दी है,लेकिन यह देखने वाली बात होगी कि प्रशासन कब तक अपनी बात को पूरी करता है। जिम्मेदार प्रशासन के अधिकारी कब तक आवारा जानवरों से लोगों को निजात दिलाते हैं या नही ?





















