
काशीपुर – हर पल खौफ के साये में जीने को मजबूर काशीपुर के लोगों के दर्द को समझने वाला कोई नहीं है, लगातार हो रही बारिश से नदियां उफान पर हैं और नदियों के किनारे टूट रहे हैं, बारिश का कहर बाढ़ बनकर बह रहा है और इस आपदा के कारण अब तक सैकड़ों लोगों के घर जलमग्न हो गये है, वहीं प्रशासन के बाढ़ की तैयारियों को लेकर किये गए दावे पूरी तरह से धराशायी नजर आ रहे हैं, नदी के किनारे बसे लोग जिन्दगी की जद्दोजहद में लगे हैं और प्रशासन को बाढ़ की जानकारी तक नहीं है।
देर रात से हो रही बारिश से काशीपुर की ढेला नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे नदियों के किनारे बसे सैकड़ों लोग अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में लगे है, ढेला नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों के घरों में पानी भर गया है, जिससे वहां रहने वाले लोग दूसरी जगहों पर आसरा लेकर किसी तरह से अपनी जान बचा रहे है, नदी का जल स्तर लगातार ही बढ़ता जा रहा है, वहीं स्थानीय लोग लगातार ही प्रशासन से मदद की गुहार तो लगा रहे हैं। लेकिन प्रशासन द्वारा कोई भी ठोस कदम अभी तक नहीं उठाये गये है, जबकि हर साल बाढ से पहले प्रशासन द्वारा बाढ़ चौकियां बनाकर और बाढ़ से बचने के इंतजामों के दावे करता है लेकिन नदियों का जलस्तर बढ़ते ही प्रशासन के दावों की पोल खुलकर सामने आ जाती है।

लगातार बढता ढेला नदी का जलस्तर लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है, वहीं बरसात से पहले प्रशासन द्वारा बनाई गयी बाढ़ चौकियों में न तो कोई कर्मचारी ही मौजूद है, और न ही हेल्पलाइन नम्बरों पर ही कोई जवाब दे रहा है, वहीं इस पूरे मामले में उपजिलाधिकारी से भी सम्पर्क किया गया तो उन्होंने भी फोन उठाने की जहमत तक नहीं की। जबकि स्थानीय समाजसेवियों ने मौके पर जाकर राहत बचाव में लोगों की मदद की।
बहरहाल हर साल बाढ़ से राहत बचाव और बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा बडे बडे वादे किये जाते है,यही नहीं बाढ़ चौकियां बनाने से लेकर लोगों कि मदद के लिए हर तरह के दावे किये जाते हैं, जिसमे सरकार का लाखों रुपया बी पानी की तरह बहाया जाता है, लेकिन बरसात आते ही दावे तो बाढ़ के पानी में बह जाते है, और लोगों को किसी तरह की कोई राहत प्रशासन की ओर से नहीं मिल पाती, वहीं इन सब पर किये जाने वाले सरकारी धन का भी दुरुपयोग साफ नजर आता है।





















