– 6 जुलाई को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे एसडीएम किच्छा और थाना प्रभारी
– हाईकोर्ट ने कहा, सिविल कोर्ट की अंतरिम निषेधाज्ञा प्रभावी है, पुलिस किसी भी पक्ष को उल्लंघन न करने दे।
– इंडिया नज़र ब्यूरो नैनीताल/किच्छा – ऊधम सिंह नगर के चर्चित खान फार्म भूमि विवाद मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि जब सक्षम सिविल न्यायालय द्वारा विवादित भूमि के संबंध में पहले से अंतरिम निषेधाज्ञा (स्टे) लागू थी, तब उसी संपत्ति को लेकर बीएनएसएस की धारा 164 के तहत कार्यवाही किस आधार पर शुरू की गई।
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) किच्छा और थाना प्रभारी किच्छा को 6 जुलाई 2026 को सुबह 10:30 बजे न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। दोनों अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि सिविल कोर्ट के प्रभावी आदेश के बावजूद धारा 164 के तहत कार्रवाई शुरू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
याचिका में क्या कहा गया ?

सिकंदर आलम खान द्वारा दायर रिट याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रतिवादी पक्ष द्वारा विवादित संपत्ति में हस्तक्षेप किया जा रहा है तथा याचिकाकर्ता, उसके कर्मचारियों और परिसर में रहने वाले लोगों की सुरक्षा खतरे में है। याचिका में पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा निजी प्रतिवादियों को कानून अपने हाथ में लेने से रोकने की मांग भी की गई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि किच्छा के सिविल जज ने 11 जून 2026 को पारित अंतरिम निषेधाज्ञा में प्रतिवादियों को विवादित भूमि पर वादियों के शांतिपूर्ण कब्जे में हस्तक्षेप करने, कृषि गतिविधियों में बाधा डालने अथवा उन्हें जबरन बेदखल करने से रोक दिया था। यह आदेश आज भी प्रभावी है और न तो निरस्त किया गया है और न ही संशोधित।





हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 11 जून 2026 को सिविल न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम निषेधाज्ञा पूरी तरह प्रभावी और बाध्यकारी रहेगी। न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि ”वे इस आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें, कानून-व्यवस्था बनाए रखें और किसी भी पक्ष को सिविल न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने की अनुमति न दें।”
न्यायालय ने प्रथम दृष्टया यह माना कि अंतरिम निषेधाज्ञा लागू होने के लगभग 20 दिन बाद उसी संपत्ति को लेकर बीएनएसएस की धारा 164 के तहत कार्यवाही शुरू किया जाना स्पष्टीकरण की मांग करता है। इसी कारण एसडीएम और थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।




















