

– इंडिया नज़र ब्यूरो | देहरादून – उत्तराखंड के भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। विभाग की दो महत्वपूर्ण डिजिटल योजनाओं, MDTSS (माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम) और ई-रवन्ना सिक्योरिटी पेपर का चयन राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित ‘SKOCH Group’ द्वारा दिए जाने वाले ‘SKOCH Award – India’s Honest Independent Honour’ के लिए किया गया है। इन योजनाओं को 106वें SKOCH समिट में सम्मानित किया जाएगा।
यह पुरस्कार शासन और विकास के क्षेत्र में बेहतर काम, पारदर्शिता और नवाचार के लिए दिया जाता है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह सफलता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और पारदर्शी कार्यप्रणाली के कारण संभव हो सकी है। उनके नेतृत्व में इन दोनों योजनाओं को तैयार किया गया और सफलतापूर्वक पूरे राज्य में लागू किया गया।
यह पुरस्कार शासन और विकास के क्षेत्र में बेहतर काम, पारदर्शिता और नवाचार के लिए दिया जाता है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह सफलता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और पारदर्शी कार्यप्रणाली के कारण संभव हो सकी है। उनके नेतृत्व में इन दोनों योजनाओं को तैयार किया गया और सफलतापूर्वक पूरे राज्य में लागू किया गया।

आपको बता दे कि MDTSS एक आधुनिक डिजिटल सिस्टम है, जिसे खनिजों (रेत, बजरी, पत्थर आदि) के परिवहन पर नजर रखने के लिए बनाया गया है। इसके जरिए खनिज को खदान से लेकर गंतव्य तक ऑनलाइन ट्रैक किया जाता है।
इस सिस्टम की खास बातें है इससे खनिज परिवहन की पूरी डिजिटल निगरानी होती है। यह ई-रवन्ना और ई-ट्रांजिट परमिट से जुड़ा सिस्टम है, इससे अवैध खनन और अवैध परिवहन पर रोक लगेगी। इसके साथ ही इससे RFID और ANPR कैमरों से वाहनों की पहचान हो जायेगी। वेब्रिज से वाहन के वजन की जांच और ओवरलोडिंग पर अलर्ट जारी करेगा। राजस्व और रॉयल्टी की स्वचालित गणना होगी। राज्य और जिला स्तर पर रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी। इससे खनन कार्य में पारदर्शिता बढ़ी है और सरकारी राजस्व में सुधार हुआ है।
राज्य में पहले रवन्ना (खनिज परिवहन प्रपत्र) साधारण कागज पर छपते थे, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना रहती थी। अब सरकार ने विशेष सुरक्षा फीचर वाले कागज पर रवन्ना छापने की व्यवस्था लागू की है।
अब नए रवन्ना प्रपत्रों में शामिल हैं, यूनिक QR कोड, वॉटरमार्क, माइक्रो-टेक्स्ट, अमिट स्याही। इन सुरक्षा फीचर्स के कारण फर्जी या डुप्लीकेट रवन्ना बनाना संभव नहीं है। इससे अवैध परिवहन पर रोक लगी है और राज्य के राजस्व में वृद्धि हुई है।
28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में विभाग के सचिव और निदेशक द्वारा यह सम्मान प्राप्त किया जाएगा। यह सम्मान पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व और प्रेरणा और सम्मान की बात है।























