
– इंडिया नज़र ब्यूरो | किच्छा – क्षेत्रीय विधायक तिलक राज बेहड़ ने केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने या बदलने के कथित प्रयास को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि देश के गांवों, गरीबों, मजदूरों और किसानों की आजीविका की रीढ़ है।
विधायक बेहड़ ने कहा कि इस योजना का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा जाना भारत की उस विचारधारा का प्रतीक है, जो सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय पर आधारित है। ऐसे में मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाने का प्रयास न केवल दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं के भी विरुद्ध है।
विधायक बेहड़ ने कहा कि इस योजना का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा जाना भारत की उस विचारधारा का प्रतीक है, जो सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय पर आधारित है। ऐसे में मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाने का प्रयास न केवल दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं के भी विरुद्ध है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सम्मान पर सीधा आघात है और साथ ही उन करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों व युवा कार्यकर्ताओं का भी अपमान है, जो मनरेगा के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
विधायक बेहड़ ने आरोप लगाया कि भाजपा और केंद्र सरकार लगातार इतिहास को बदलने, महापुरुषों के योगदान को मिटाने और युवाओं को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। कभी पाठ्यक्रम बदले जाते हैं, कभी योजनाओं के नाम, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सच्चाई से दूर रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि जिस मनरेगा को कमजोर करने का प्रयास केंद्र सरकार कर रही है, उसी मनरेगा ने कोरोना काल जैसे कठिन समय में करोड़ों लोगों को भुखमरी से बचाया और उन्हें सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराया।
विधायक बेहड़ ने कांग्रेस पार्टी के युवाओं और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस मुद्दे को लेकर गांव-गांव और जन-जन तक गोष्ठियों के माध्यम से सच्चाई पहुंचाएं और महात्मा गांधी के नाम व उनके विचारों की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक संघर्ष करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने का फैसला वापस नहीं लिया, तो यह आंदोलन देशव्यापी रूप लेगा। कांग्रेस पार्टी राष्ट्रपिता के सम्मान और गरीबों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ेगी।





















