


– इंडिया नज़र ब्यूरो रुड़की – भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT रुड़की) ने उत्तराखंड राज्य और जर्मनी के ब्रांडेनबुर्ग संघीय राज्य सरकार के बीच हस्ताक्षरित संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent – JDI) के अवसर पर एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक, समन्वयक और सुगमकर्ता की भूमिका निभाई। यह घोषणा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में भारत–जर्मनी के राज्य-स्तरीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
यह संयुक्त आशय घोषणा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देने की भारत सरकार की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। साथ ही यह उत्तराखंड सरकार की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है, जिसके तहत राज्य को उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

समझौते के अंतर्गत IIT रुड़की और यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम के सहयोग से संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम, संयुक्त डिग्री पहल, स्टार्ट-अप और उद्योग से जुड़ी गतिविधियां तथा क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके साथ ही एक संयुक्त सूचना एवं कौशल केंद्र और भारत–जर्मनी स्टार्ट-अप्स पर केंद्रित उद्योग संपर्क कार्यालय की स्थापना का भी प्रस्ताव है।
यह सहयोग विशेष रूप से आपदा लचीलापन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, स्वच्छ ऊर्जा और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था, ड्रोन एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों, नवीन सामग्री और उन्नत विनिर्माण, तथा ई-गवर्नेंस, स्वास्थ्य सेवा और साइबर सुरक्षा में डेटा विज्ञान एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा।
संयुक्त आशय घोषणा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उत्तराखंड सरकार, ब्रांडेनबुर्ग सरकार, IIT रुड़की, यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम और अन्य संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक संयुक्त कार्यबल का गठन किया जाएगा। यह कार्यबल सहयोग की प्राथमिकताओं की पहचान करेगा, एक विस्तृत रोडमैप तैयार करेगा और भविष्य में औपचारिक समझौता ज्ञापन (MoU) का प्रस्ताव रखेगा।
शैक्षणिक और अनुसंधान क्षेत्र की दो प्रतिष्ठित संस्थाओं—IIT रुड़की और यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम—की सक्रिय भागीदारी से यह पहल भारत और जर्मनी के बीच दीर्घकालिक, नवाचार आधारित और सतत विकास को प्रोत्साहित करने वाली साझेदारी के रूप में उभरने की उम्मीद है। यह समझौता ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ठोस योगदान देने की क्षमता रखता है।
























