
– नाहिद खान धराली (उत्तरकाशी) – धराली की पहाड़ियों में 5 अगस्त की भीषण आपदा ने जब हर ओर तबाही और डर का साया फैला रखा था, तब इंसानियत और रिश्तों की महक से भरा एक ऐसा लम्हा देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर आंख को नम कर दिया।
गुजरात के अहमदाबाद के ईशनपुर की रहने वाली श्रीमती धनगौरी बरौलिया अपने परिवार के साथ गंगोत्री दर्शन के लिए उत्तराखंड आई थीं। लेकिन अचानक आई जलप्रलय ने उनका रास्ता रोक लिया। चारों ओर बहते मलबे और तेज धार के बीच वे और उनका परिवार धराली में फंस गए। हालात इतने खतरनाक थे कि बाहर निकलने की कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही थी।

प्रदेश सरकार के त्वरित निर्देश पर राहत दल ने कठिन पहाड़ी रास्तों और खतरनाक बहाव के बीच जान की बाजी लगाकर लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू किया। तीन दिनों से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं वहीं डटे रहे, राहत और बचाव कार्य की एक-एक बारीकी पर नजर रखते हुए। आखिरकार, रेस्क्यू टीमों के अथक प्रयासों से धनगौरी बरौलिया और उनके परिवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
लेकिन असली भावुक पल तब आया जब रक्षाबंधन से एक दिन पहले, बचाव के बाद राहत शिविर में खड़ी धनगौरी ने अपनी आंखों में आंसू और दिल में कृतज्ञता लिए, अपने दुपट्टे का एक टुकड़ा फाड़कर मुख्यमंत्री धामी की कलाई पर राखी बांध दी। वो कह रही थीं –“भैया, आपने हमें मौत के मुंह से निकालकर फिर से जिंदगी दी है।”
मुख्यमंत्री ने भी भावुक होकर राखी स्वीकार की और आश्वासन दिया कि “इस कठिन घड़ी में प्रदेश सरकार हर नागरिक के साथ है, हम आपकी सुरक्षा और पुनर्वास के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।”
धराली के पहाड़ों में आपदा के मलबे के बीच यह दृश्य मानवीय संवेदनाओं, भाई-बहन के रिश्ते और सामाजिक एकजुटता की ऐसी मिसाल बन गया, जिसे आने वाले समय में लोग सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उम्मीद की कहानी के रूप में याद करेंगे।






















