
‘वो पल याद करके आज भी मेरे शरीर में सिरहन दौड़ जाती है, जब मेरा पेट्रोल पम्प लूटने वाले लुटेरों ने मेरे पति के सिर पर पिस्टल तान रखी थी. उनकी जान को खतरा था। ऐसे में मुझे निर्णय लेना ही था। मैने अपने पति की जान बचाने के लिये लुटेरे पर अपने रिवाल्वर से गोली चला दी और अपने पति की जान बचा ली।”- पूनम अग्रवाल , भाजपा नेत्री व उद्योगपति
– इंडिया नज़र ब्यूरोकिच्छा – ऊपर लिखी यह पंक्तिया उनकी जाबाज़ी की कहानी की एक झलक मात्र है, वो किसी से नहीं डरती, उन्हें अपने ईश्वर और अपने कर्म पर पूरा भरोसा है। उद्योग जगत में काम करना महिलाओ के लिये आसान नहीं है। उन्हें संघर्ष से गुज़रना पड़ता है, लेकिन इस संघर्ष से वो मज़बूत होती है और किसी से भी टकराने को तैयार रहती है। जैसे पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ में कर्नल सोफ़िया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने जो महिलाये थी। इन्होने दुनिया में भारत का डंका बजा दिया। ”महिलाओ को कोई कमज़ोर न समझे यह मोदी का भारत है।”

यह विचार उद्योगपति से राजनीति के क्षेत्र में आई भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य और चम्पावत की प्रभारी श्रीमती पूनम अग्रवाल के है। वो न केवल राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय है बल्कि अपने व्यवसाय को भी बखूबी संभाल रही है। वो गृहणी के रूप में परिवार और राजनीतिक, सामाजिक रूप में समाज की सेवा कर रही है।
श्रीमती पूनम अग्रवाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नहटौर की रहने वाली है। उनका विवाह 1980 में उद्योगपति गोपाल कृष्ण अग्रवाल के साथ हुआ था। विवाह के बाद वो भी अपने पति के व्यवसाय में हाथ बटाने लगी। उस समय उनकी चंडीगढ़ में APS पेपर एंड बोर्ड फ़ैक्ट्री थी। जिसे पूनम अग्रवाल ने बखूबी दस साल तक संचालित किया। लेकिन आतंकवाद के दौर में इसे बंद करना पड़ा। जिसके बाद पूनम अग्रवाल वापस किच्छा आ गई और यह अपने पति के पेट्रोल पम्प और अन्य व्यवसाय को संचालित करने लगी।
वर्ष 2000 में उन्होंने अपने निवास पर स्थापित पेट्रोल पम्प को किच्छा बाईपास पर स्थानांतरित कर दिया था, वो इलाका सुनसान था। कई बार उनके पेट्रोल पम्प को लुटेरों ने लूटने का प्रयास किया था।
श्रीमती पूनम अग्रवाल ऐसी ही एक घटना का जिक्र करती हुई बताती है कि ”उस दिन मैं अपने पति गोपाल कृष्ण अग्रवाल के साथ पेट्रोल पम्प पर बैठी हुई थी। अचानक लुटेरों ने पेट्रोल पम्प घेर लिया उनकी संख्या तीन या चार थी। एक लुटेरा हमारे केबिन में घुस आया और उसने मेरे पति के सर पर तमंचा तान दिया। समझ नहीं आ रहा था क्या करू ? फिर सोचा मरने से अच्छा है कुछ किया जाये। फिर मैने लुटेरे पर अपनी रिवाल्वर से गोली चल दी। जिससे वो घायल हो गया। लुटेरे भाग खड़े हुए। उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि कोई महिला इतना साहस कर सकती है। इसके बाद वहा कोई वारदात नहीं हुई।”

श्रीमती पूनम अग्रवाल ने राजनीतिक शास्त्र से एम ए किया है अपने छात्र जीवन से ही उनके भीतर सामाजिक और धार्मिक कार्य करने की रूचि रही है। जिसे उन्होंने अपने विवाह के बाद भी जारी रखा है। वो निरंतर समाजसेवा और धार्मिक कार्य में सक्रिय भूमिका निभा रही है। वर्तमान में अग्रवाल महिला समिति की अध्यक्ष है। प्रदेश अग्रवाल महिला परिषद की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रही है, वो भाजपा जिला महिला मोर्चा की ग्रामीण मंडल की जिला अध्यक्ष भी रही है। राजनीति में वो महिलाओ को जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की केंद्र और प्रदेश सरकार की सरकारी योजनाओ की जानकारी के लिये जागरूक कर रही है। वो दो बच्चो के शिक्षा का खर्चा भी वहां कर रही है। इसके अलावा उन्होंने वनवासी बृजवासी सेवा आश्रम में भी बच्चो को शिक्षा के लिये योगदान दिया है।

वर्तमान में वो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र चम्पावत की प्रभारी है और प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भी है। उनका कहना है कि निकट भविष्य में यदि पार्टी उन्हें किच्छा नगर पालिका के अध्यक्ष के पद के लिये टिकट देती है तो वो क्षेत्र की स्वर्णिम विकास की नई गाथा लिखेंगी।
























