
रुद्रपुर – जिले के किच्छा तहसील के रामेश्वरपुर गाँव में जन्मे हरविंदर सिंह चुघ के भीतर मानवसेवा का ऐसा ज़ज़्बा है कि उन्होंने अपने दम पर एक पूरी टीम खड़ी कर दी है, जी हम बात कर रहे है गुरु रामदास जी सेवा ट्रस्ट की। इसका संचालन हरविंदर सिंह चुघ कर रहे है। इस संस्था की सेवा अनमोल है और यह लोगो के जीवन बचाने के लिये निस्वार्थ सेवा में लगी हुई है।
गुरु रामदास जी सेवा ट्रस्ट अभी तक अनगिनत रोगियों को ब्लड देने से लेकर दुर्घटना में घायल हुए लोगो को व्हीलचेयर, वाकर की सुविधा प्रदान कर रहा है। इसके अलावा आक्सीजन सिलेंडर और आक्सीजन मीटर से लेकर दवाई मरहम पट्टी तक की सेवा में लगा हुआ है।
गुरु रामदास जी सेवा ट्रस्ट हर उस गरीब के लिये किसी फ़रिश्ते से कम नहीं है, जिसका कोई सहारा नहीं है,उसका सहारा गुरु रामदास जी सेवा ट्रस्ट और उसके सदस्य मिलकर कर रहे है। एक तरह से यही सच्ची मानव सेवा है।

हरविंदर सिंह चुघ ने बताया कि उनको ऐसे लोगो की सेवा करने में बहुत आनन्द और सकून मिलता है। लोगो की दुआओ से ही यह ट्रस्ट आगे बढ़ रहा है। लोग इससे जुड़ रहे है और मदद कर रहे है। जिसका दुनिया में कोई नहीं है और जो निर्धन है उसकी मदद कर सके, इससे अच्छा कुछ हो ही नहीं सकता।

हरविंदर सिंह चुघ ने इस सेवा की शुरुआत कैसे की, इसकी भी दिलचस्प कहानी है, ‘इंडिया नज़र’ से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब वो हाई स्कूल का पेपर देने जा रहे थे, तभी उनके सामने एक मुल्ला जी का एक्सीडेंट हो गया। उनके भीतर की मानवता जाग गई। मुल्ला जी के काफी खून निकल रहा था। उन्हें अस्पताल ले जाना ज़रूरी था। हालांकि उस वक्त उनकी उम्र काफी कम थी। उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने अपना हाई स्कूल का पेपर छोड़ दिया और वो घायल मुल्ला जी को लेकर अग्रसेन अस्पताल पहुंचे। उन्होंने उन्हें वहा भर्ती करवाया साथ ही पहली बार ब्लड भी दिया। मुल्ला जी की जान बचा कर उनको लगा कि उन्होंने अपनी मानवता की परीक्षा पास कर ली है।

हरविंदर सिंह चुघ बताते है इस घटना के बाद उनकी ज़िन्दगी में नया मोड़ आ गया और उन्होंने मानवता की सेवा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया। आज लोग उन्हें ब्लडमेन के नाम से जानते पहचानते है। लगभग बीस साल से निस्वार्थ वो सेवा में लगे हुए है। एक साल पहले ही उन्होंने गुरु रामदास जी सेवा ट्रस्ट बनाया है। अब वो इस बैनर के नीचे अपना काम कर रहे है।
गुरु रामदास जी सेवा ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने अपनी सेवा का विस्तार भी किया है। दस साल से एक कमरे में बंद एक अपाहिज व्यक्ति को उन्होंने व्हीलचेयर देकर उनकी ज़िन्दगी को सवारने की कोशिश की है।

सबसे बड़ा काम उनकी ट्रस्ट लगभग 250 थेलिसीनिया के मरीज़ो के लिये कर रही है। इन पीड़ित लोगो को हर पखवाड़े ब्लड चढ़ाना पड़ता है। इनको लगातार ब्लड देकर इनकी ज़िन्दगी बचाने का काम कर रही है।
हरविंदर सिंह चुघ को बिना किसी भेदभाव के मानव सेवा के लिये पुलिस, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, प्रशासन और अनेको संस्थाओ द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। आगे की मानव सेवा की यह यात्रा जारी रहेगी, सबको इन संस्थाओ का स्रह्योग करना चाहिये।




















