

– हिमांशु तिवारी नैनीताल/हल्द्वानी – उत्तराखंड के कुमायूँ क्षेत्र के कई जिलों में भारी बारिश ने आफत पैदा कर दी है। नदी,नाले और नदिया उफान पर है और अपना रौद्र रूप दिखा रही है। जिससे पहाड़ी क्षेत्र के साथ ही हल्द्वानी में भी जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है।
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज़्यादा असर निर्धन वर्ग पर हुआ है। उनके आशियाने जलमग्न क्षेत्रों में बने हुए है। बरसती पानी के कहर से उनके घरो में पानी भर गया है। जिला प्रशासन द्वारा उन्हें रेस्क्यू करके सुरक्षित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। बरसात के डर से बीती रात प्रभावित लोगो ने अपनी रात जाग कर गुज़ारी है।

हल्द्वानी के गोला बैराज से बीती रात 55000 क्यूसिक पानी छोड़ा गया है। जिससे किच्छा क्षेत्र के पुरानी मंडी,पुलभट्टा,सिरोली और सतुईया क्षेत्र आंशिक प्रभावित हुए है। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई है।
हल्द्वानी के उपजिलाधिकारी मनीष कुमार सिंह पूरी रात पानी से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते रहे। एसएसपी पंकज भट्ट के निर्देश पर पुलिस की टीम एसडीआरएफ और अन्य टीमों के साथ रात भर जुटी रही। लोगो को सुरक्षित क्षेत्रों में जाने की मुनादी भी की गई।
लेकिन इस सबके बाबजूद पानी से काफी दुकानों और घरो में रखे सामान का नुक्सान हुआ है। लोगो ने छतो पर रात गुज़ारी है। काठगोदाम क्षेत्र में भी 250 से ज़्यादा परिवारों को रेस्क्यू किया गया है।

सिटी मजिस्ट्रेट रिचा सिंह ने भी जलभराव इलाको का दौरा कर तुरंत कार्यवाही के निर्देश दिये और जलभराव से प्रभावित लोगों को स्कूल में ठहराने की व्यवस्था करवाई गई है। नदी नालो के ओवर फ्लो होने से राहत और बचाव के कार्य में दिक्कत आ रही है।
यह विडम्बना ही है कि कुमायूँ की लाईफ लाईन समझे जाने वाला यह शहर हर बार बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या से रूबरू होता है और नगर में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस समस्या का अभी तक कोई स्थाई हल नहीं ढूँढा गया है।

मुख्यत; इस समस्या के पीछे अनियोजित बसावट भी है, नदी नाले वाले क्षेत्रों में कंक्रीट के जंगल उग आये है और लोगो ने पानी निकासी वाले क्षेत्रों में कब्ज़ा कर लिया है। ऐसे में पानी की समुचित निकासी न होने पर शहर में जलभराव हो रहा है। नागरिको की मांग है शासन को इस गंभीर समस्या के समाधान के लिये कार्यवाही करनी चाहिए।





















