– ई. जमील ए खान, सीएमडी सामिआ ग्रुप
नई दिल्ली – देश के प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई कुशल वक्ता के साथ साथ प्रखर लेखक, पत्रकार,कवि और कोमल हृदय के इंसान थे। देश के प्रति उनके भीतर गजब की देशभक्ति कूट कूट कर भरी हुई थी। वो विपक्ष में रहकर भी अपनी भूमिका बखूबी निभाते थे,उनके मुख से मृद शब्दो का ही प्रयोग होता था वो सत्तापक्ष से सवाल भी कुटीले अंदाज से करते थे और जब वो देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने विपक्ष की बात को हमेशा गंभीरता से लिया। जो उन्हे सब राजनेताओं से अलग रखती थी।

आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें स्मरण कर कुछ पुरानी यादें ताजा हो गई,जिन्हे मैं आप सब से सांझा कर रहा हूं। बात 2003-2004 की है। प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्यरत सभी सीनियर और जूनियर कर्मचारियों के लिए नोएडा सेक्टर-62 में पीएमओ आवास नाम से एक आवासीय परियोजना का निर्माण होना था।
इस योजना को निर्माण करने की जिम्मेदारी मुझे सौपी गई थी। इस दौरान पी एम ओ में कार्यरत तत्कालीन संयुक्त सचिव अशोक प्रियदर्शनी,अशोक सैकिया एवं छतर सिंह के साथ महीने में साउथ ब्लॉक प्रधानमंत्री कार्यालय में मीटिंग होती रहती थी। उस वक्त अटल बिहारी बाजपेई जी प्रधानमंत्री थे। जो पी एम ओ आवास परियोजना पर अपने संयुक्त सचिवों से चर्चा करते रहते थे। उनके भीतर काम कराने के साथ ही उस योजना को सही तरीके से लागू करने की चिंता रहती थी।
तब मुझे अंदाजा हुआ कि अटल जी आम नेताओ से कुछ अलग थे। हमारी परियोजना को वो देख रहे थे और उस योजना से जुड़े लोगों ओर टीम के बारे में जानकारी लेते रहते थे।
अटल जी 1960 में पहली बार बलरामपुर से सांसद निर्वाचित हुए थे। यह मेरे लिए फक्र की बात थी, कि मेरी जन्मभूमि भी बलरामपुर के महाराजगंज थी। ऐसे में खुद के अंदर प्रधानमंत्री कार्यालय जाकर एक अच्छी फीलिंग महसूस करता था, कि मैं आज ऐसे इंसान से जुड़ा हूं जो मेरी मिट्टी जन्मभूमि और मेरे गांव से जुड़ा रहा है। एक तरह से लगता था अपने गांव वाले के ऑफिस में आया हूं।

अटल जी का किरदार इतना बड़ा था कि वो बड़ी से बड़ी बातो को भी कुटिल अंदाज में कविता के माध्यम से बयां कर दिया करते थे और अपने लोगो के गलत कार्यों की भी खुले मन से आलोचना करते थे।
स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई जी को उनके पुण्यतिथि पर मेरी ओर से हार्दिक श्रद्धासुमन। अटल जी आपके विचार और सौम्यता हमेशा लोगो के दिलो में बनी रहेगी।





















