
– अज़हर मलिककाशीपुर – उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गर्मी इतनी बढ़ गई है, कि पार्टियों को बदलाव की रणनीति अपनानी पढ़ रही है। मंत्रणाओं और मैराथन बैठकों के बाद आखिरकार कांग्रेस आलाकमान ने 2022 के विधानसभा चुनाव अभियान के लिए अपनी सेना का एलान कर दिया है। कांग्रेस प्रदेश की सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही है कांग्रेस ने किसी एक खेमे को तरजीह देने के बजाय सबको साथ लेने और खुश करने की कोशिश की है,किन्तु कांग्रेस की एक कोशिश नाकाम होती हुई दिखाई दे रही है। कांग्रेस के इस फैसले के बाद कांग्रेस के अंदर आपसी कलह बढ़ता ही जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस संगठन में मिशन 2022 को लेकर की गई कवायद के बाद भी कांग्रेस धड़ों में बटी नजर आ रही है। पार्टी हाईकमान ने 10 कमेटियों का गठन कर करीब 180 से ज्यादा सदस्यों की सूची जारी की है। जिसमें हर धड़े को खुश करने की कोशिश की गई है, लेकिन बावजूद इसके पार्टी में अंसतोष के सुर सुनाई दे रहे हैं। अपने मन मुताबिक पदों के बंटवारे के बाद भी समितियों में कुछ अप्रत्याशित नामों को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत नाराज बताए जा रहे हैं।
कभी हरीश के सिपहसलार रहे पूर्व मंत्री किशोर उपाध्याय, पूर्व मंत्री नवप्रभात और विधायक हरीश धामी भी खासे नाराज बताए जा रहे हैं। नव प्रभात तो अपनी नाराजगी का खुलकर इजहार भी कर चुके हैं। कांग्रेस की विपक्षी पार्टियों खुलकर कांग्रेस पार्टी की फजीहत करती हुई दिखाई दे रही है। वहीं कांग्रेसी नेता आपसी गुटबाजी को स्वीकार तो कर रहे हैं। लेकिन गुटबाजी खत्म करने के बदले गुटबाजी को लोकतंत्र का नाम देकर पल्ला झाड़ते हुए दी दिखाई दे रहे हैं।
वहीं कांग्रेस के इस फेरबदल वाले फैसले पर विपक्ष पाटिया भी जमकर चुटिया लेती हुई दिखाई दे रही है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल ने कांग्रेस के इस फैसले को विनाशकारी फैसला बताया है और कांग्रेस के इस फैसले से कांग्रेस की स्थिति आगामी विधानसभा चुनाव में 2017 से भी बुरी होने वाली है।





















