– इंडिया नज़र ब्यूरो
देहरादून – उत्तराखंड के 11 वे मुख्यमंत्री के रूप में अब तक के सबसे युवा पुष्कर सिंह धामी को भाजपा आलाकमान ने कमान सौप कर यह दिखाने की कोशिश की है, कि अब उत्तराखंड युवाओ के हाथ में है। साथ ही धामी के किसान का बेटा होने पर तराई के कृषि बाहुल्य क्षेत्र में किसानो को भी सन्देश दिया है कि अब किसानो की आवाज़ को अनसुना नहीं किया जायेगा।
धामी को ऐसे समय में मुख्यमंत्री का ताज पहनाया गया है,जबकि राज्य में भाजपा के बीच भी गुटबाज़ी चरम पर है। अगले कुछ महीनो में ही विधानसभा के चुनाव होने है। राज्य की अर्थव्यवस्था बुरी तरह डोल रही है। वरिष्ठ नेता युवा चेहरे को पचा नहीं पा रहे है। ऐसे में पुष्कर सिंह धामी को कई मोर्चो पर अपनी राजनीतिक अस्त्रों से विरोधी वाणो को रोकना होगा। कोविड से परेशान हाल किसानो,व्यापारियों और आमजन के लिए रोजगार परक योजनाओ को जल्दी शुरू करना होगा ताकि उन्हें राहत मिल सके।
उनको अपनी क्षमता से बहुत जल्द नया सन्देश देने की कोशिश करनी होगी जिससे लगे कि वो आमजन के नेता है। उनके कार्यक्षमता से ही अगले चुनाव की वैतरणी पार होगी। अगर उन्होंने कछुवा गति दिखाई पूर्व मुख्यमंत्रियों की तरह गलतिया की तो वो भी बलि का बकरा बना सकते है। जितना वो सावधान सतर्क रहेंगे उतनी बड़ी पारी खेल सकते है।





















