– भावेश पांडेय, संस्थापक
(गोविंद भगवत प्रोडक्शन) विश्व संगीत दिवस पर विशेष
संगीत सिर्फ सात सुरों में बंधा नहीं होता. इसे बांधने के लिए विश्व की सीमाएं भी कम पड़ जाती हैं. संगीत दुनिया में हर मर्ज की दवा मानी जाती है. यह दुखी से दुखी इंसान को भी खुश कर देती है, संगीत का जादू एक मरते हुए इंसान को भी खुशी के लम्हे दे जाता है।
संगीत दुनिया में हर जगह है. अगर इसे महसूस करें तो दैनिक जीवन में संगीत ही संगीत भरा है। कोयल की कूक, पानी की कलकल, हवा की सरसराहट हर जगह संगीत ही तो है, बस जरूरत है तो इसे महसूस करने की. अपनी जिंदगी के व्यस्त समय से कुछ पल सुकून के निकालिए और महसूस कीजिए इस संगीतमय दुनिया की धुन को. संगीत मानव जगत को ईश्वर का एक अनुपम दैवीय वरदान है. यह न सरहदों में कैद होता है और न भाषा में बंधता है. माना हर देश की भाषा, पहनावा और खानपान भले ही अलग हों। लेकिन हर देश के संगीत में सभी सात सुर एक जैसे होते हैं और लय-ताल भी एक सी होती है।
संगीत हर इंसान के लिए अलग मायने रखता है. किसी के लिए संगीत का मतलब अपने दिल को शांति देना है, तो कोई अपनी खुशी का संगीत के द्वारा इजहार करता है. प्रेमियों के लिए तो संगीत किसी रामबाण या ब्रह्मास्त्र से कम नहीं।
वर्तमान समय में संगीत एक ऐसा सशक्त माध्यम है, जो व्यक्ति को शारीरिक-मानसिक रोगों व व्याधियों से मुक्ति प्रदान करता है. कॅरियर के नजरिए से संगीत का क्षेत्र असीम संभावनाओं से भरा है. देश में आये दिन बढ़ते चैनलों ने युवाओं के लिए संगीत के क्षेत्र में काफी संभावनाएं पैदा की हैं. लोगों में जहां एक ओर डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर आदि बनने की ख्वाहिश रहती है, वहीं आज बदले परिवेश में गायक, वादक व नर्तक बनने की चाहत रखने वालों की भी तादाद बढ़ी है.
प्रस्तुति – प्रदीप फुटेला





















