
बाजपुर – कोरोना का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है लगातार ही कोरोना के केस बढ़ते जा रहे है ऐसे में जहां सरकार प्रशासन के साथ मिलकर कोरोना से बचाव के लिए रात्रि कर्फ्यू और लॉकडाउन लगाने की तैयारी में है, वहीं निजी स्कूलों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है, यहां निजी स्कूल मासूमों की जिन्दगी से खिलवाड करते हुए महज फीस के लालच में बच्चों को स्कूल बुलाकर उनकी जिन्दगी को दांव पर लगा रहे है, जबकि सरकार के स्पष्ट निर्णय है कि पांचवीं तक के बच्चों को स्कूल ना बुलाया जाये बावजूद एसी कौन सी मजबूरी है, स्कूलों की जो मासूमों की जिन्दगी से खेल रहे है।

देश में कोरोनावायरस का प्रकोप फिर से बढ़ रहा है लेकिन कुछ लोग पैसों के लालच में देश के भविष्य की जान को दांव पर लगाकर कोरोना संक्रमण को फैलने का न्योता दे रहे हैं। यही कारण है कि सरकार के कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को विद्यालय में ना आने के आदेश जारी होने के बाद भी विद्यालय प्रबंधन फीस के लालच में मासूम बच्चों की जिंदगी को कोरोना के जाल में धकेलने का काम कर रहे है, लेकिन विभागीय अधिकारी कार्यवाही करने की जहमत तक नही उठा रहे है। ऐसा ही एक नजारा बाजपुर में देखने को मिला। जहां शिक्षा विभाग के अधिकारी सरकार के आदेशों का पालन कराने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं। बाजपुर के सेंट मॉन्टेसरी स्कूल में जहां स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों से फीस वसूलने के लिए कक्षा 1 से 5 तक के मासूम बच्चों की जिंदगी को दांव पर लगाकर स्कूल में बुलवाया जा रहा है। इतना ही नही प्रबंधन द्वारा बच्चों की परीक्षा भी करवाई जा रही है। बावजूद इसके जब बाजपुर के ही राजकीय इंटर कॉलेज बन्नाखेड़ा में एक अध्यापक और तीन छात्र बीते दिन कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

वही जब स्कूल प्रबंधन से बिना अनुमति के विद्यालय में मासूम बच्चों को बुलाने की जानकारी ली गई तो उन्होंने अभिभावकों को इसका जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों द्वारा बच्चों को परीक्षा कराने के लिए स्कूल में भेजा जा रहा है।
जिलाधिकारी ने इस पूरे मामले में जांच कर कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए है,साथ ही उन्होंने कहा है कि कोरोना गाईड लाईन का सभी लोग पालन करे ,जिससे इसकी रोकथाम हो सके।
बहरहाल लचर प्रशासनिक ढांचे का इससे बडा क्या उदाहरण हो सकता है जब सरकारी नियमों की खुलकर धज्जियां उड रही हों और विभागिय अधिकारी मूक दर्शक बने किसी अनहोनी का इन्तजार कर रहे हों, कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए भले ही सरकार कितने बडे दावे कर ले लेकिन प्रशासनिक अमला सरकार के मंसूबों पर किस तरह से पानी फेर रहा है इससे बडा और क्या उदाहरण हो सकता है जब मासूमों की जिन्दगी को दांव पर रख दिया हो और कार्यवाही के नाम पर महज जांच का हवाला देकर पल्ला झाड दिया गया गया हो।





















