
– अज़हर मलिक
रामनगर – क्या आज के वैज्ञानिक युग में ‘गऊ मूत्र’ के जड़ी बूटियों के मिश्रण से बनाई गई दवाई के सेवन से लोगो की ज़िन्दगी में नई रौशनी आ सकती है ? सवाल भले ही पेचीदा हो और वैज्ञानिक युग में ऐसे किसी इलाज को वैज्ञानिक मान्यता न दे। लेकिन एक ‘गऊ वैध’ के मशहूर प्रदीप भंडारी इन सवालों से परे ‘गऊ मूत्र क्रान्ति’ से असाध्य रोगो का इलाज कर रहे है। यह कोई करिश्मा है या अंधभक्ति ? इसका जबाब खोजने ‘इंडिया नज़र’ की टीम ‘गऊ मूत्र क्रान्ति’ औषधालय पहुँचती है। जहाँ सैकड़ो की संख्या में युवक,महिलाये,बच्चो से लेकर बूढ़ो तक इलाज कराने के लिये कतार में खड़े थे, यह ‘गऊ मूत्र क्रांति’ को ईश्वरीय चमत्कार समझ रहे है।
‘गऊ मूत्र क्रांति’ की यह चमत्कारिक दुनिया उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र के बन्नाखेड़ा के पास एक छोटे से गांव पवलगढ़ की है। पिछले करीब दस वर्ष से यहां एक वैध ‘गऊ मूत्र क्रांति’ नाम से अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के जरिये प्राचीन चिकित्सा पदत्ति को पुनर्जीवित करने के साथ ही आयुर्वेद को एक नया आयाम दिया है। वैध का दावा है कि उनके देशी फार्मूले ने अब तक कैंसर,ब्लड कैंसर,कोरोना, गठिया, शुगर, मिर्गी, थाईराईड, मोटापा, मस्तिष्क रोग, हैपेटाईटिस बी और सी सहित एचआईवी जैसे गंभीर असाध्य रोगों से जूझ रहे रोगियों को गऊ मूत्र और जड़ी बूटियों के मिश्रण से बनने वाली चमत्कारिक दवा से नया जीवन दिया है। कई मरीजों को तो मौत के मुंह से न सिर्फ बचाया बल्कि उन्हें सामान्य जीवन जीने लायक बनाकर उम्मीद की नई किरण जगाई हैं।
वैसे दुनिया में गौ मूत्र के साथ जड़ी बूटियों का मिश्रण कर दवाई बना कर कोई इलाज नहीं करता है। इस अजूबे क्लीनिक पर विश्वास की सबसे बड़ी वजह लोगो को इससे बीमारियों में चमत्कारिक लाभ हो रहा है। ऐसे इलाज को पौराणिक कथाओ में ही सुना गया है,लेकिन यहां ऐसा साक्षात हो रहा है। जो वैज्ञानिको के लिये भी शोध का विषय हो सकता है।

(गऊ मूत्र क्रांति संचालक प्रदीप भंडारी)
‘गऊ मूत्र क्रांति’ के सूत्रधार वैध प्रदीप भंडारी है, इनकी माने तो यह खुद ही एक बीमारी से ग्रस्त थे। उन्होंने अपने इलाज के लिये सभी चिकित्सको को दिखाया था,किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ। बकौल भंडारी तब उन्होंने निराश होकर ‘गऊ माता’ की भक्ति शुरू कर दी, जिसपर उन्हें चमत्कारिक सिद्धि प्राप्त हो गई। जिससे ‘गऊ मूत्र’ के सहारे वो पिछले दस सालो से अपना जीवन मानव सेवा में लगाए हुए है। समाज के लिये अदभुत कार्य के लिये संत समाज ने वैध प्रदीप भंडारी को सम्मानित भी किया है।
(मरीज)
बॉन ट्यूमर से पीड़ित एक मरीज़ का दावा है कि जब वो इस ‘गऊ औषधालय’ में आये थे,तब उन्हें पकड़ कर लाया गया था। एक माह यहां की दवाई से वो पचास प्रतिशत ठीक हो गये है। ऐसे ही बहुत से मरीज़ खुद को ठीक होने का दावा करते है। यह कोई सिद्धि का चमत्कार है या जड़ी बूटियों से बनाई गई दवाई का असर ? इस पर शोध करवा कर ही इस रहस्य से पर्दा उठाया जा सकता है।
फिलहाल तो यह ‘गऊ मूत्र क्रांति’ बिखेरने वाला यह औषधालय लोगो के इलाज का मरकज बना हुआ है। यहां मरीज़ की न जाति पूछी जाती है और धर्म। सिर्फ और सिर्फ मानव सेवा के लिये ही लोगो की ज़िन्दगी में नया प्रकाश बिखेर रहा है। चाहे कोई इसे अंधविश्वास कहे.लेकिन यहां होने वाले इलाज से मरीज़ो को नई ज़िन्दगी मिल रही है।





















