

– नाहिद खान के साथ काशीपुर से अजहर मलिक
ऊधम सिंह नगर – आप इन तस्वीरो को देख कर विचलित हो सकते है कि कैसे केंद्र सरकार के तीन कृषि बिलो के खिलाफ एक किसान का दर्द छलका और उसने अपने गेहू की खड़ी फसल को ट्रैक्टर से रोंदने की कोशिश की। लेकिन किसानो के इस दर्द को न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार महसूस कर रही है। जिसके कारण किसानो का सरकार के प्रति गुस्सा बना हुआ है और वो लगातार आंदोलन कर रहे है। एक मार्च को रुद्रपुर में विशाल किसान महा पंचायत भी होने वाली है। जिसको लेकर किसान तैयारी कर रहे है।
जिस घटना का ऊपर चर्चा की गई है, वो घटना काशीपुर के बाँस खेड़ा खुर्द गॉव की है। जहाँ
किसान ने केंद्र सरकार के तीन कृषि बिलो के खिलाफ अपने खून पसीने से मेहनत करके लहलहाती पकी गेहूँ की फसल को नष्ट करने का निर्णय लिया था। खेत में खड़ी फसल को ट्रैक्टर से रौंदवा रहे है। यह तस्वीरें बहुत दुःखदायी है कि किसानो को अपनी आवाज़ बुलंद करने लिये फसल को नष्ट करने फैसला लेना पड़ा। मौके पर कुछ किसानो ने किसी तरह आक्रोशित किसान का समझा बुझा कर उसे फसल नष्ट करने से रोका।
अपनी फसल जोतने वाले किसान का साफ़ साफ़ कहना है कि केंद्र सरकार तीन कृषि बिलो को लाकर किसानो को बर्बाद करने पर तुली हुई है। उसे किसानो की भावनाओ की कद्र नहीं है। ऐसे में जब हमारी खेती ही मर जायेगी तो हमारे पास क्या विकल्प बचेगा। सरकार को किसानो की आवाज़ को सुनना चाहिए,जिससे इस समस्या का समाधान हो सके।
यह बेहद दुःखद है कि देश का अन्नदाता आज सड़कों पर आंदोलन कर रहा है, कभी यही
अन्नदाता खेतों में खड़ी फसल को देख कर खुश हुआ करता था। लेकिन आज वो चिंता में डूबा हुआ है। कभी देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान जय किसान’ का नारा बुलंद किया था। देश में अन्नदाता को ही देश में सर्वोच्च इज़्ज़त थी,किन्तु आज इसी अन्नदाता को देशद्रोही और फ़र्ज़ी किसानो के नाम से सम्बोधित किया जा रहा है,जो शुभ संकेत नही है।

इस मामले में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष धर्म सिंह पड्डा का कहना है कि सरकार किसानो की बात नहीं सुन रही है। वही फसल जोतने को उन्होंने सही कदम नहीं बताया। साथ ही कहा किसान दुखी होकर ऐसा कदम उठा रहा है। हमने फसल नष्ट करने वाले किसान को समझा दिया है।





















