
नई दिल्ली- केंद्र सरकार के लाये तीन नये कृषि कानूनों का जिस तरह पंजाब और हरियाणा में ज़बरदस्त विरोध है। उससे जहाँ सरकार भी किसान आंदोलन को ख़त्म करने लिये सब जतन कर रही है। वही पंजाब और हरियाणा में जिस तरह रिलायंस कंपनी का किसानो ने विरोध जताया है और उसके टावरों को नुक्सान पहुंचाया है। उससे कंपनी विचलित है। रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड के माध्यम से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उसका तीन कृषि कानूनों से कोई सम्बन्ध नहीं है और न ही कंपनी को इससे कोई लाभ पहुंच रहा है। याचिका में उपद्रवियों द्वारा जियो के मोबाइल टावरों को निशाना बनाने से तत्काल रोकने के लिये सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
कृषि कानूनों के विरोध में पिछले कुछ दिन से पंजाब में जियो के मोबाइल टावरों को निशाना बनाया जा रहा था। अब रिलायंस इंडस्ट्रीजल लिमिटेड ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड के जरिए पंजाब और हरियाण हाई कोर्ट में उपद्रवियों पर सरकारी प्राधिकरणों द्वारा तत्काल हस्तक्षेप करने के लिए याचिका दायर की है। इससे पहले कंपनी ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी।
इसके साथ ही कंपनी द्वारा कोर्ट में यह भी स्पष्टीकरण दिया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, रिलायंस रिटेल लिमिटेड (RRL), रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड (RJIL) और रिलायंस से जुड़ी कोई भी अन्य कंपनी न तो कॉरपोरेट या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करती है और न ही करवाती है। उसका इस बिजनेस में उतरने का कोई इरादा भी नहीं है।
रिलायंस ने किसानो का समर्थन करते हुए कहा है कि किसान अन्नदाता है,उसको अपनी उपज का समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिले ताकि किसान को उसक उपज का अच्छा मूल्य मिल सके। उन्होंने किसानो से अपील भी की है कि उनकी कंपनी के किसानो के बीच जो गलतफहमिया फैलाई जा रही है ,वो पूरी तरह गलत और बेबुनियाद है।

























