
– नाहिद खान ऊधम सिंह नगर – उत्तराखंड राज्य में बाहरी व्यक्तियों को ज़मीन खरीदने पर रोक लगाने के लिये तत्कालीन उत्तराँचल सरकार ने भूअध्यादेश लागू किया था,जिससे यहां बाहरी राज्यों से लोगो को ज़मीन खरीदने पर अंकुश लग सके। लेकिन यह क्या जिले के किच्छा और रुद्रपुर तहसील के दर्जन भर गाँवो में लगभग दो हज़ार से ज़्यादा कृषक प्रमाण-पत्रों में से पांच सौ से लेकर छः सौ फ़र्ज़ी कृषक प्रमाण-पत्र राजस्व कर्मियों और दलालो की वजह से बन गये है। जिसका लाभ कृषक न होते हुए भी बाहरी राज्यों से आये व्यक्ति उठा रहे है।

इस बात का खुलासा भाईचारा एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष के पी गंगवार द्वारा लगाईं गई सूचना अधिकार से हुआ। रुद्रपुर-किच्छा के आसपास के क्षेत्रों से लगभग 500 से 600 ऐसे लोगों को फर्जी कृषक प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं। जिनका उत्तरांचल की भूमिधरी अधिनियम की धारा 129 के तहत उत्तराखंड राज्य में कुछ भी नहीं है। लेकिन राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से इन लोगों ने फर्जी कृषक प्रमाण-पत्र प्राप्त करके रुद्रपुर व आसपास के क्षेत्रों में जमीन का एक बहुत बड़ा खेल खेला है।
अब भाईचारा एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष के पी गंगवार का कहना है कि सभी फर्जी कृषक प्रमाण पत्रों की जांच की मांग शासन प्रशासन से कर रहे है। यदि यहां सुनवाई नहीं हुई तो वो इस मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय तक जायेंगे।
उनका कहना है कि दो तहसील क्षेत्रों में जितने भी फर्जी कृषक प्रमाण पत्र जारी किये गये,उनको बनाने वाले और बनवाने वालो दलालो और भृष्ट राजस्व कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग को लेकर भाईचारा एकता मंच मोर्चा खोलेगा,ताकि दूसरे राज्य के यहां फ़र्ज़ी कृषक प्रमाण-पत्र बनाकर भूमि का खेल खेलने वालो को बेनकाब कर सके।





















