
-आलोक मल्ल
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर 2020 को जनसंदेश टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह और धनंजय सिंह के ख़िलाफ़ ऑफ़िसियल्स सीक्रेट ऐक्ट के तहत एफ़आईआर दर्ज हुई है। इन दोनों पर आरोप हैं कि उन्होंने गोपनीय दस्तावेज़ अवैध तरीक़े से प्राप्त किए और फिर उसके आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की।
16 सितंबर, 2020- सीतापुर में रवींद्र सक्सेना पर क्वारंटीन सेंटर पर बदइंतज़ामी की ख़बर सरकारी काम में बाधा डालने, आपदा प्रबन्धन के अलावा एससी/एसटी ऐक्ट की धाराओं के तहत मुक़दमा।
19 जून, 2020- वाराणसी में सुप्रिया शर्मा पर पीएम के गोद लिए गांव डोमरी में भूखे रहने को विवश लोगों की ख़बर लिखने पर एससी/एसटी एक्ट- 1989, किसी की मानहानि करने से जुड़ी आईपीसी की धारा 501 और किसी महामारी को फैलाने में बरती गई लापरवाही से जुड़ी आईपीसी की धारा 269 के तहत मामला दर्ज।

31 अगस्त, 2019- मिर्ज़ापुर में पंकज जायसवाल पर सरकारी स्कूल में व्याप्त अनियमितता और मिड डे मील में बच्चों को नमक रोटी खिलाए जाने से संबंधित ख़बर पर एफआईआर, हंगामा होने के बाद पंकज जायसवाल का नाम एफ़आईआर से हटाया गया।
10 सितंबर, 2019- आज़मगढ़ के एक स्कूल में छात्रों से झाड़ू लगाने की घटना को रिपोर्ट करने वाले छह पत्रकारों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर, पत्रकार संतोष जायसवाल के ख़िलाफ़ सरकारी काम में बाधा डालने और रंगदारी मांगने संबंधी आरोप।
7 सितंबर, 2020 को बिजनौर में दबंगों के डर से वाल्मीकि परिवार के पलायन करने संबंधी ख़बर के मामले में पांच पत्रकारों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर। पांच पत्रकारों आशीष तोमर, शकील अहमद, लाखन सिंह, आमिर ख़ान तथा मोइन अहमद के ख़िलाफ आईपीसी की धारा 153A, 268 तथा 505 के तहत एफ़आईआर. मामले में त्रुटिपूर्ण विवेचना की बात कहते हुए संज्ञान लेने से माननीय न्यायालय का इन्कार।
अभी सिर्फ पांच मामलों का वर्णन है, पत्रकारों के उत्पीड़न के अभी और भी मामले हैं। भाजपा की नजर में सिर्फ अर्नब गोस्वामी ही पत्रकार हैं, ऐसा क्यों ? सुशांत सिंह आत्महत्या मामले में किसी का नाम नहीं था तो सीबीआई जांच, अर्नब गोस्वामी मामले में आत्महत्या करने वाले ने सुसाइड नोट में अर्नब गोस्वामी का नाम लिखा है फिर अर्नब गोस्वामी निर्दोष, क्यों ?




















