विशेष संवाददाता
ऊधम सिंह नगर : उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविन्द पांडेय के विधानसभा क्षेत्र के 1500 आबादी वाले आधा दर्जन गॉवो में आने जाने का कोई रास्ता ही नहीं है। यहां रहने वाले स्थानीय लोगो और स्कूली बच्चो को हरिपुरा जलाशय को नाव से पार करके गॉव तक का सफर तय करना पड़ता है।
इनकी सुध न तो निर्वाचित विधायक और न ही जिला प्रशासन ले रहा है ,जिसके कारण यह रोज़ अपनी जान जोखिम में डाल कर नाव के सहारे आ जा रहे है। आज़ादी के बाद भी यह गॉव विकास के छटपटा रहा है।
बता दे कि जंगल के किनारे हरिपुरा जलाशय से सटे कोपा मुनस्यारी गॉव में अब खतरों से खेल कर अपने घर जाना नियति बन गया है। ग्रामीणों को अस्पताल,बाज़ार और अपने बच्चो को स्कूल भेजने के लिये नाव का ही सहारा है। यदि रात को कोई एमरजेंसी पड़ भी जाए तो वो शहर नहीं जा पायेगा,क्यों कि शाम के बाद नाव का सफर बंद हो जाता है। इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आज़ाद भारत में वो भी तराई के सबसे संपन्न जिले में ग्रामीणों के ऐसे हालात है।
डाम से गॉव की दूरी तीन किलोमीटर है और इस डाम की गहराई सिचाई विभाग के अभिलेखों में 93 फिट है, लेकिन पानी का लेबल 45 फिट तक रहता है। ऐसे में हवा के झोको और बरसात के दिनों में नाव का संतुलन भगवान् भरोसे ही रहता है। ग्रामीण नेताओ के आश्वासनों के सहारे ही जी रहे है। कई मुख्यमंत्रियों के समक्ष ग्रामीणों ने अपनी समस्या के हल के लिये गुहार लगाईं ,लेकिन सबसे सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले। अब ग्रामीण मीडिया के मध्यमा से अपनी आवाज़ बुलंद करना चाहता है।




















