

नई दिल्ली – गाजीपुर में किसानो का आंदोलन कवर कर रहे स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पूनिया की दिल्ली पुलिस द्वारा बिना किसी कारण के झूठा आरोप लगा कर गिरफ्तारी करने से पूरे देश में पत्रकारों में उबाल आया हुआ है। पत्रकार इसे कलम की आज़ादी पर हमला बता रहे है और इसे केंद्र सरकार की अघोषित अमरजेंसी बता रहे है।
देश भर में मनदीप पूनिया के पक्ष में पत्रकार बिरादरी के धरना प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा तो वापस नहीं लिया है। लेकिन एक अच्छी खबर आ रही है कि स्वतंत्र बेबाक पत्रकार मनदीप सिंह की दिल्ली रोहिणी कोर्ट ने उन्हें 25 हज़ार के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया है। मनदीप ने खुद को फ़र्ज़ी केस में दिल्ली पुलिस पर फ़साने का आरोप लगाया था।
उन्होंने किसान आंदोलन को तोड़ने की साजिश को अपने फेस बुक पेज पर लाईव रिपोर्टिंग की थी। पत्रकार अक्सर ऐसा ही करते भी है। लेकिन इन दिनों मनदीप पुनिया ही नहीं बल्कि अनेक ऐसे पत्रकार है जो सरकार के खिलाफ रिपोर्टिंग करने की वजह से आपराधिक धाराओं के आरोप में मुकदमे झेल रहे है। मीडिया भी दो गुटों में बटे होने के कारण इसके खिलाफ मुखर होकर आवाज़ बुलंद नहीं कर रहा है।
उत्तराखंड में भी उठे विरोध के स्वर :
दिल्ली से पत्रकार मनदीप पुनिया के पक्ष में उठी आवाज़ उत्तराखंड में भी पहुंच गई है,आज ऊधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के बैनर तले मनदीप की निर्दोष गिरफ्तारी और उनके विरुद्ध मुकदमा वापस लेने की मांग को लेकर डीडी चौक पर पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस का पुतला दहन किया और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिला अध्यक्ष राजीव चावला का कहना है कि केंद्र सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस पत्रकारों पर ज़ुल्म कर रही है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। मनदीप पुनिया बेक़सूर था समस्त पत्रकार उसके पक्ष में खड़े है। इसे हर तरह की सहायता उपलब्ध करवाई जायेगी और एक टीम उससे मिलने जायेगी। किसी भी सूरत में कलम की ताकत को रुकने नहीं दिया जायेगा।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के आकाश आहूजा का कहना है कि सरकार हमेशा से ही पत्रकारों की आवाज़ को दबाने का काम करती रही है। मनदीप पूनिया उन बेबाक और निडर पत्रकारों में से एक था जिसने सच दिखने की हिमाकत की थी। जिसका नतीजा यह निकला कि उनपर दिल्ली पुलिस के कार्य में बाधा डालने के झूठे आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया। हमारा विरोध इसी बात को लेकर है,ऐसे में कोई निष्पक्ष पत्रकारिता कैसे कर पायेगा। हम दिल्ली पुलिस की तानाशाही के खिलाफ राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी भेजेंगे।
‘आज तक’ के रमेश चंद्रा का कहना है कि दिल्ली पुलिस के इस कृत्य को पत्रकार बर्दाश्त नहीं करेंगे। युवा पत्रकार अज़हर मलिक का कहना है कि पत्रकारों को एकजुट रहने की ज़रुरत है,जिससे अपने ऊपर हुए ज़ुल्म के खिलाफ पत्रकार आवाज़ उठा सके।




















