
– संजय नागपालनैनीताल – एक तो भारत देश की सालों से कृषि विपणन व्यवस्था ही कुछ ऐसी है। जिसमें किसान सदैव ही नुकसान उठाता रहा है। दूसरा सत्तारूढ़ सरकारों द्वारा उसे ठीक करने पर कोई ध्यान ही नही दिया गया। किसानों से सदैव ही ठग विद्या कर उनकी फसलें खरीद ली जातीं रहीं,पर बड़ा सवाल यह है, कि उन उत्पादों की बिक्री जबरदस्त मुनाफ़े के बाद आमजन के लिए उपलब्ध कराई जाती है। एक तरफ़ देश के किसानों को उनकी फसलों का उचित भाव नही मिल पाता। दूसरी ओर व्यापारियों द्वारा उस अनाज को मोटा मुनाफ़ा लेकर बिक्री की जाती है। कृषकों को कम दामों में अपनी फसलों को बेचने पर विवश होना पड़ता है।
दरअसल हमारे अधिसंख्यक किसानों के पास खेती की जोत बहुत छोटी है। इसलिए नए कृषि कानूनों से छोटे किसानों को कोई राहत भविष्य में भी मिलती नही दिखती है। अन्नदाता खेतों में तो कमरतोड़ मेहनत कर सकता है।पर अपने उत्पादित अनाज,फसलों को बिक्री के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर महंगे डीज़ल के कारण नही ले जा सकता, क्योंकि उक्त सभी खर्चे भी उनकी फसलों की लागत को बढ़ाते जाएंगे।इसी वजह से किसान अपने आस पास के बाजारों,व्यापारियों को ही उक्त फसलों को बेचता रहा है।
चलो मान भी लिया जाए कि नए कृषि कानूनों व कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग से छोटे किसानों की फसल सीधे उनके खेतों से ही उठ जाएगी और उन्हें अपनी फसलों को बेचने के लिए दर-दर की ठोकरें नही खानी पड़ेंगी। उन्हें अपनी फसलों का अच्छा मूल्य भी मिल जाएगा,किन्तु फिलवक्त यह कृषि बिल दोधारी तलवार ही लगता है, क्योंकि बड़े घरानों को कृषि बाज़ार उपलब्ध कराया जा रहा है। जिससे वो अपनी मनमर्जी से उनकी बिक्री मूल्य तय करेंगे।
कुल मिलाकर नए कृषि बिल के जरिये केंद्र सरकार छोटे व मझोले किसानों को विपणन की अव्यस्थाओं से मुक्ति दिलाने के नाम पर कॉर्पोरेट सेक्टर को मोटा मुनाफ़ा कमाने के लिए बाजार तो उपलब्ध करा ही रही है। नए कृषि बिल के मुताबिक़ कॉर्पोरेट्स को अब बड़े स्टॉक होल्ड करने की खुली छूट होगी और इन कॉर्पोरेट्स द्वारा भी इन खाद्य उत्पादों की बिक्री सही मूल्यों में की जा सके, इसके लिए भी केंद्र की सरकार को “अधिकतम बिक्री मूल्य” के लिए भी एक बिल लाना चाहिए। जिससे देश की आमजन को भी सही मूल्यों में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। तभी जनता को कुछ राहत मिल सकेगी। अन्यथा इतना तो निश्चित है कि किसानों के लाभ को दोगुना करने की जुगत में लाये इस कृषि बिल से आमजन को ठगने की क़वायद रंग जरूर लाएगी।
























