

– इंडिया नज़र ब्यूरो रुद्रपुर –ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर शहर के लिए यह एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण रहा जब वरिष्ठ भाजपा नेता और आपातकाल के दौर के संघर्षशील कार्यकर्ता कस्तूरी लाल तागरा को आखिरकार ‘लोकतंत्र सेनानी’ का आधिकारिक सम्मान मिल गया। दशकों के लंबे इंतजार, पत्राचार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद शासन ने उन्हें सम्मान के साथ पेंशन देने का आदेश जारी कर दिया है।
इस उपलब्धि के पीछे रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा के लगातार प्रयास निर्णायक साबित हुए। महापौर ने इस मामले को व्यक्तिगत स्तर पर उठाते हुए इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुँचाया और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की पैरवी की। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिव शैलेश बगौली ने जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब कराई और उत्तराखंड लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम 2025 तथा पूर्ववर्ती शासनादेशों के आधार पर पेंशन की संस्तुति कर दी गई।
इस उपलब्धि के पीछे रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा के लगातार प्रयास निर्णायक साबित हुए। महापौर ने इस मामले को व्यक्तिगत स्तर पर उठाते हुए इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुँचाया और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की पैरवी की। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिव शैलेश बगौली ने जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब कराई और उत्तराखंड लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम 2025 तथा पूर्ववर्ती शासनादेशों के आधार पर पेंशन की संस्तुति कर दी गई।
शासन के आदेश के अनुसार ”कस्तूरी लाल तागरा को 14 जून 2017 से 13 अक्टूबर 2022 तक की अवधि के लिए 16 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से पेंशन दी जाएगी। इसके बाद की अवधि के लिए 20 हजार रुपये प्रतिमाह की बढ़ी हुई दर से पेंशन स्वीकृत की गई है।”
कस्तूरी लाल तागरा आपातकाल 1975 के दौरान लोकतंत्र की बहाली के आंदोलन में सक्रिय रहे। उस समय वे लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति के जरिए विरोध प्रदर्शनों में जुटे थे। विद्यार्थी परिषद से जुड़े होने के कारण उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ और सत्याग्रह करने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने लखनऊ जेल में साढ़े 14 माह तक कारावास झेला और यातनाएँ भी सहीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लंबे समय तक लोकतंत्र सेनानी का दर्जा और पेंशन नहीं मिल सकी।
मामला वर्षों तक फाइलों में उलझा रहा, लेकिन महापौर विकास शर्मा ने पद संभालने के बाद इसे अपने वरिष्ठ मार्गदर्शक के सम्मान की लड़ाई मानते हुए लगातार शासन स्तर पर फॉलोअप किया। अंततः सरकार ने उनके संघर्ष को मान्यता देते हुए सम्मान और आर्थिक सहायता दोनों स्वीकृत कर दी।
महापौर विकास शर्मा ने कहा कि ”यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि आपातकाल के काले दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले हर सेनानी के त्याग का सम्मान है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सचिव शैलेश बगौली का आभार जताते हुए कहा कि सरकार ने ऐतिहासिक न्याय किया है।”
शहर में इस निर्णय को लेकर खुशी का माहौल है और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया है।
कस्तूरी लाल तागरा का कहना है कि “आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे संघर्ष के वर्षों को पहचान मिल गई हो। 1975 में जब देश में आपातकाल लगा, तब हमने लोकतंत्र बचाने के लिए आवाज उठाई थी। उसके लिए जेल गया, यातनाएँ सहीं, लेकिन कभी अफसोस नहीं हुआ। दुख सिर्फ इस बात का था कि हमें लोकतंत्र सेनानी के रूप में मान्यता नहीं मिल पा रही थी।”
उन्होंने कहा कि ”आज सरकार ने जो सम्मान और पेंशन दी है, वह सिर्फ मेरे लिए नहीं बल्कि उन सभी साथियों के लिए है जिन्होंने उस दौर में लोकतंत्र की मशाल जलाए रखी। मैं महापौर विकास शर्मा का विशेष आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने इस मुद्दे को अपना मानकर लड़ाई लड़ी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शासन का भी धन्यवाद, जिन्होंने देर से ही सही लेकिन न्याय दिया।”
कस्तूरी लाल तागरा आपातकाल 1975 के दौरान लोकतंत्र की बहाली के आंदोलन में सक्रिय रहे। उस समय वे लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति के जरिए विरोध प्रदर्शनों में जुटे थे। विद्यार्थी परिषद से जुड़े होने के कारण उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ और सत्याग्रह करने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने लखनऊ जेल में साढ़े 14 माह तक कारावास झेला और यातनाएँ भी सहीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लंबे समय तक लोकतंत्र सेनानी का दर्जा और पेंशन नहीं मिल सकी।
मामला वर्षों तक फाइलों में उलझा रहा, लेकिन महापौर विकास शर्मा ने पद संभालने के बाद इसे अपने वरिष्ठ मार्गदर्शक के सम्मान की लड़ाई मानते हुए लगातार शासन स्तर पर फॉलोअप किया। अंततः सरकार ने उनके संघर्ष को मान्यता देते हुए सम्मान और आर्थिक सहायता दोनों स्वीकृत कर दी।
महापौर विकास शर्मा ने कहा कि ”यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि आपातकाल के काले दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले हर सेनानी के त्याग का सम्मान है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सचिव शैलेश बगौली का आभार जताते हुए कहा कि सरकार ने ऐतिहासिक न्याय किया है।”
शहर में इस निर्णय को लेकर खुशी का माहौल है और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया है।
कस्तूरी लाल तागरा का कहना है कि “आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे संघर्ष के वर्षों को पहचान मिल गई हो। 1975 में जब देश में आपातकाल लगा, तब हमने लोकतंत्र बचाने के लिए आवाज उठाई थी। उसके लिए जेल गया, यातनाएँ सहीं, लेकिन कभी अफसोस नहीं हुआ। दुख सिर्फ इस बात का था कि हमें लोकतंत्र सेनानी के रूप में मान्यता नहीं मिल पा रही थी।”
उन्होंने कहा कि ”आज सरकार ने जो सम्मान और पेंशन दी है, वह सिर्फ मेरे लिए नहीं बल्कि उन सभी साथियों के लिए है जिन्होंने उस दौर में लोकतंत्र की मशाल जलाए रखी। मैं महापौर विकास शर्मा का विशेष आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने इस मुद्दे को अपना मानकर लड़ाई लड़ी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शासन का भी धन्यवाद, जिन्होंने देर से ही सही लेकिन न्याय दिया।”























