
– इंडिया नज़र ब्यूरो |नई दिल्ली/ किच्छा | दिल्ली के झंडेवालान क्षेत्र में स्थित प्राचीन हिन्दू धार्मिक स्थल दरगाह मंदिर बाबा श्री पीर रतन नाथ जी की भूमि पर DDA और MCD द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस मामले में नैनीताल-ऊधम सिंह नगर से सांसद एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट ने दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
सांसद अजय भट्ट द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि ”उक्त धार्मिक स्थल की भूमि वर्ष 1974 में DDA द्वारा विधिवत रूप से आवंटित की गई थी, जहां दशकों से धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियाँ शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही हैं। यह स्थल स्थानीय जनभावनाओं, आस्था और सामाजिक समरसता से गहराई से जुड़ा हुआ है।”

पत्र में यह भी बताया गया है कि ”29 नवंबर 2025 को DDA और MCD द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या वैकल्पिक व्यवस्था के भारी मशीनरी लगाकर तोड़-फोड़ की गई। इस कार्रवाई से धार्मिक स्थल को नुकसान पहुँचा, साथ ही बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी बाधित कर दी गईं, जिससे श्रद्धालुओं में गहरा रोष व्याप्त है।”
सांसद अजय भट्ट ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह विषय केवल भूमि या निर्माण का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली जैसे महानगर में इस प्रकार की कार्रवाई से जनभावनाएँ आहत होती हैं और सामाजिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने दिल्ली सरकार से आग्रह किया है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह मांग पत्र श्रद्धालुओं की ओर से सांसद प्रतिनिधि राकेश गुप्ता के माध्यम से सांसद अजय भट्ट तक पहुँचाया गया था, जिस पर सांसद ने तत्परता दिखाते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

सांसद प्रतिनिधि राकेश गुप्ता का कहना है कि “झंडेवालान स्थित बाबा श्री पीर रतन नाथ जी का यह प्राचीन धार्मिक स्थल केवल एक इमारत नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। बिना किसी पूर्व सूचना के DDA और MCD द्वारा की गई कार्रवाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है। हमने यह विषय सांसद अजय भट्ट जी के संज्ञान में लाया, जिन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत दिल्ली की मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। हमें विश्वास है कि सरकार इस मामले में न्यायपूर्ण और सकारात्मक निर्णय लेगी।”






















