





– प्रदीप बंसल, मैनेजिंग डायरेक्टर
दीपावली, जिसे “दीपोत्सव” के नाम से भी जाना जाता है, भारत का सबसे पावन और उल्लासमय त्यौहार है। यह सिर्फ दीप जलाने या मिठाइयाँ बाँटने का पर्व नहीं, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। दीपावली हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन हर घर, हर गली, हर मंदिर दीपों की रौशनी से जगमगा उठता है। यह त्यौहार देश में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश लेकर आता है।
दीपावली क्यों मनाई जाती है-
दीपावली मनाने के पीछे कई ऐतिहासिक और धार्मिक कथाएँ प्रचलित हैं, जो भारत की विविध संस्कृति और परंपराओं का सुंदर चित्र प्रस्तुत करती हैं।
दीपावली, जिसे “दीपोत्सव” के नाम से भी जाना जाता है, भारत का सबसे पावन और उल्लासमय त्यौहार है। यह सिर्फ दीप जलाने या मिठाइयाँ बाँटने का पर्व नहीं, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। दीपावली हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन हर घर, हर गली, हर मंदिर दीपों की रौशनी से जगमगा उठता है। यह त्यौहार देश में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश लेकर आता है।
दीपावली क्यों मनाई जाती है-
दीपावली मनाने के पीछे कई ऐतिहासिक और धार्मिक कथाएँ प्रचलित हैं, जो भारत की विविध संस्कृति और परंपराओं का सुंदर चित्र प्रस्तुत करती हैं।

भगवान श्रीराम का अयोध्या आगमन: सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम जब चौदह वर्ष के वनवास और रावण वध के बाद अयोध्या लौटे, तो अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। सम्पूर्ण अयोध्या दीपों की ज्योति से आलोकित हो उठी। तभी से यह पर्व “दीपावली” कहलाया और प्रकाश के माध्यम से शुभता का प्रतीक बना।
भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर वध – कुछ परंपराओं में दीपावली को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध से भी जोड़ा जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का एक और प्रतीक है।
माता लक्ष्मी की पूजा – दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और जो घर स्वच्छ, प्रकाशमान और श्रद्धा से भरा होता है, वहाँ स्थायी रूप से निवास करती हैं। इसीलिए इस दिन घरों की सफाई, सजावट और दीप प्रज्वलन का विशेष महत्व होता है।
गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व – दीपावली का संबंध सिख धर्म से भी है। इसी दिन सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व भी मनाया जाता है।
जैन धर्म में महत्व – जैन धर्म के अनुयायी दीपावली को भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं। उनके ज्ञान और मुक्ति की स्मृति में दीप जलाए जाते हैं।
दीपावली का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
दीपावली सिर्फ धार्मिक त्यौहार नहीं, बल्कि यह सामाजिक एकता और प्रेम का भी प्रतीक है। इस दिन लोग पुराने झगड़ों को भूलकर एक-दूसरे के घर मिठाई लेकर जाते हैं, शुभकामनाएँ देते हैं और रिश्तों में नई मिठास भरते हैं।
दीपों की रोशनी हमें यह संदेश देती है कि जैसे एक दीपक अंधकार मिटा देता है, वैसे ही एक शुभ विचार, एक प्रेमपूर्ण भावना समाज के द्वेष और नफरत के अंधकार को दूर कर सकती है।
दीपावली आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। व्यापारी समुदाय इस दिन “चोपड़ा पूजन” करते हैं और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत मानते हैं। बाजारों में रौनक होती है, छोटे दुकानदारों से लेकर कारीगरों तक, हर किसी के जीवन में समृद्धि का संचार होता है।
दीपावली और पर्यावरण
आज आवश्यकता है कि हम दीपावली को “प्रेम और प्रकाश का पर्व” बनाये रखें, न कि “प्रदूषण का”। पटाखों के शोर और धुएँ की जगह मिट्टी के दीए, फूलों की सजावट और पर्यावरण–अनुकूल रोशनी का प्रयोग करें। असली खुशी तो तभी है जब हमारी खुशी किसी और के आँसू का कारण न बने। दीपावली हमें यह सिखाती है कि –
“जहाँ घृणा है वहाँ प्रेम जलाओ, जहाँ अंधकार है वहाँ दीप जलाओ।”
आइए, इस दीपावली हम सब मिलकर प्रेम, सौहार्द और सद्भाव की ज्योति जलाएँ। नफरत, अहंकार और ईर्ष्या के अंधकार को मिटाएँ। दीपों की यह पवित्र रौशनी हर हृदय में शांति, समृद्धि और सच्चे आनंद का संचार करे।
दीपावली पर्व खुशियों का पैगाम लेकर आता है।
इसे प्रेम, सद्भाव और एकता के साथ मनाएँ।
भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर वध – कुछ परंपराओं में दीपावली को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध से भी जोड़ा जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का एक और प्रतीक है।
माता लक्ष्मी की पूजा – दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और जो घर स्वच्छ, प्रकाशमान और श्रद्धा से भरा होता है, वहाँ स्थायी रूप से निवास करती हैं। इसीलिए इस दिन घरों की सफाई, सजावट और दीप प्रज्वलन का विशेष महत्व होता है।
गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व – दीपावली का संबंध सिख धर्म से भी है। इसी दिन सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व भी मनाया जाता है।
जैन धर्म में महत्व – जैन धर्म के अनुयायी दीपावली को भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं। उनके ज्ञान और मुक्ति की स्मृति में दीप जलाए जाते हैं।
दीपावली का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
दीपावली सिर्फ धार्मिक त्यौहार नहीं, बल्कि यह सामाजिक एकता और प्रेम का भी प्रतीक है। इस दिन लोग पुराने झगड़ों को भूलकर एक-दूसरे के घर मिठाई लेकर जाते हैं, शुभकामनाएँ देते हैं और रिश्तों में नई मिठास भरते हैं।
दीपों की रोशनी हमें यह संदेश देती है कि जैसे एक दीपक अंधकार मिटा देता है, वैसे ही एक शुभ विचार, एक प्रेमपूर्ण भावना समाज के द्वेष और नफरत के अंधकार को दूर कर सकती है।
दीपावली आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। व्यापारी समुदाय इस दिन “चोपड़ा पूजन” करते हैं और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत मानते हैं। बाजारों में रौनक होती है, छोटे दुकानदारों से लेकर कारीगरों तक, हर किसी के जीवन में समृद्धि का संचार होता है।
दीपावली और पर्यावरण
आज आवश्यकता है कि हम दीपावली को “प्रेम और प्रकाश का पर्व” बनाये रखें, न कि “प्रदूषण का”। पटाखों के शोर और धुएँ की जगह मिट्टी के दीए, फूलों की सजावट और पर्यावरण–अनुकूल रोशनी का प्रयोग करें। असली खुशी तो तभी है जब हमारी खुशी किसी और के आँसू का कारण न बने। दीपावली हमें यह सिखाती है कि –
“जहाँ घृणा है वहाँ प्रेम जलाओ, जहाँ अंधकार है वहाँ दीप जलाओ।”
आइए, इस दीपावली हम सब मिलकर प्रेम, सौहार्द और सद्भाव की ज्योति जलाएँ। नफरत, अहंकार और ईर्ष्या के अंधकार को मिटाएँ। दीपों की यह पवित्र रौशनी हर हृदय में शांति, समृद्धि और सच्चे आनंद का संचार करे।
दीपावली पर्व खुशियों का पैगाम लेकर आता है।
इसे प्रेम, सद्भाव और एकता के साथ मनाएँ।


























