


– इंडिया नज़र ब्यूरो
श्री धामी ने आगे कहा, “गृहमंत्री रहते हुए पं. पंत जी ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिलाने और प्रशासनिक सुधारों में जो योगदान दिया, वह सदैव याद किया जाएगा। पंत जी का संपूर्ण जीवन हमें जनसेवा और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में पं. पंत की नीतियों और विचारों का योगदान अमूल्य है। हम सभी का कर्तव्य है कि उनके आदर्शों को अपनाकर आगे बढ़ें।”
पं. गोविंद बल्लभ पंत : जीवन और योगदान –
पं. गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के खैरा गांव (कुमाऊं) में हुआ था। वे बचपन से ही मेधावी, राष्ट्रभक्त और न्यायप्रिय थे। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और वकालत के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पंत जी कई बार जेल गए। वे पंडित मदन मोहन मालवीय और महात्मा गांधी से प्रभावित होकर कांग्रेस में शामिल हुए और कुमाऊं क्षेत्र से लेकर पूरे देश में स्वतंत्रता की अलख जगाई।
स्वतंत्र भारत में वे उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने और बाद में देश के गृह मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। गृहमंत्री रहते हुए उन्होंने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिलाने, पुलिस एवं न्याय व्यवस्था में सुधार और आधुनिक प्रशासनिक ढांचे की स्थापना जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए। उनके योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 1957 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। पं. पंत का 7 मार्च 1961 को निधन हुआ, लेकिन उनकी स्मृतियां और योगदान आज भी देशवासियों को प्रेरणा देते हैं।
























