

– तिलक राज बेहड़ ने किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र सिंह लाडी को 2011 दंगे का मास्टरमाइंड बताया।
– किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र सिंह लाडी ने पलटवार करते हुए बेहड़ को भाजपा का एजेंट करार दिया।
– कांग्रेस के दोनों गुटों ने भाषाई मर्यादा को तार तार किया, ऐसे में कांग्रेस 2027 का चुनाव कैसे जीतेगी ?
रुद्रपुर – कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओ के बीच ज़ुबानी जंग ने गर्मी में और गर्माहट ही पैदा नहीं की है बल्कि राजनीतिक भूचाल भी ला दिया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और किच्छा से विधायक तिलक राज बेहड़ ने 2011 में रुद्रपुर में हुए दंगे को लेकर कांग्रेस के ही किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र सिंह लाडी पर दंगे का मास्टरमाइंड होने का गंभीर आरोप लगा दिया है। इस दंगे के बाद से ही कांग्रेस के दिग्गज नेता तिलक राज बेहड़ को रुद्रपुर से राजनीतिक शिकस्त का सामना करना पड़ा था।
इस विवाद की शुरुआत भाजपा के पूर्व विधायक राज कुमार ठुकराल के टीडीसी पर कांग्रेस के किसी नेता द्वारा कोई मांग न किये जाने के ब्यान के बाद शुरू हुआ। जिसने अब कांग्रेस के दो गुटों में आमने सामने ज़ुबानी जंग हो रही है। जिससे कांग्रेस की एकता पर अब सवाल उठ रहे है।

आज रुद्रपुर में कांग्रेस के दो गुटों में दिन भर मीडिया ट्रायल होता रहा, सबसे पहले मेयर चुनाव लड़ चुके मोहन लाल खेड़ा ने सिटी क्लब में प्रेस वार्ता करके बेहड़ के खिलाफ अमार्यादित भाषा का इस्तेमाल करने के लिये किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र सिंह लाडी से माफ़ी की मांग की। इसके एक घंटे बाद ही हरेंद्र सिंह लाडी ने भी रुद्रपुर पहुंच कर तिलक राज बेहड़ के खिलाफ सिटी क्लब में ही पत्रकार वार्ता आयोजित कर बेहड़ पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उन्हें भाजपा का एजेंट तक करार दे दिया।
शाम होते होते तिलक राज बेहड़ ने भी हरेंद्र सिंह लाडी के आरोपों का जबाब देने के लिये अपने निवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके 2011 में हुए साम्प्रदायिक दंगे में सीधा सीधा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र सिंह लाडी को ही दंगे का मास्टरमाइंड बता कर सनसनी फैला दी। इस आरोप के बाद से पूरे प्रदेश में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। बेहड़ ने लाडी पर भाजपा प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने का भी आरोप लगाया।

रुद्रपुर में कांग्रेस के दो गुटों में मीडिया के माध्यम से आरोप प्रत्यारोप लगाने के बाद अभी तक प्रदेश कांग्रेस की और से दोनों गुटों के बीच सुलह कराने या मीडिया की जगह पार्टी फोरम में रखने के कोई निर्देश नहीं दिए है। जिससे लगता है 2027 के चुनाव में कांग्रेस की आपसी गुटबाजी और ब्यान बाजी से कांग्रेस की एकता का गुब्बारा फुट गया है। ऐसे में 2027 का चुनाव जीतने का दंभ भरने वाले नेताओ का क्या होगा ?
आपको बता दे गाँधी जयंती 2 अक्टूबर 2011 को एक धार्मिक स्थल पर बेअदबी करने के मामले के खिलाफ इंद्रा चौक पर प्रदर्शनकारी जाम लगाकर बैठे थे। अचानक यह प्रदर्शन दंगे में बदल गया और देखते ही देखते पूरा नगर दंगे की आग में झुलस गया। करोडो की संपत्ति के साथ ही कई लोगो की जान गई। लेकिन दंगे की तमाम जाँचो के बाद भी दंगे के असली षड्यंत्रकारी के चेहरे से नकाब नहीं हट सका था। अब अचानक किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र सिंह लाडी को पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलक राज बेहड़ द्वारा दंगे का मास्टरमाइंड बताने से यह मामला राजनीतिक तूल पकड़ गया है। इन आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही पता चलेगा।
फिलहाल कांग्रेस के नेताओ की नूरा कुश्ती से सत्ताधारी भाजपा मज़े ले रही है, भाजपा चाहती है कांग्रेस ऐसे ही सड़को पर लड़ती रहे जिससे भाजपा चुनाव में कांग्रेस की एकता पर सवाल खड़े करके फिर से सत्ता पर काबिज़ हो सके। अब देखना होगा प्रदेश और केंद्र कांग्रेस आलाकमान दोनों गुटों को अनुशासनहीनता रोकने के लिये क्या कार्यवाही करता है।





















