
रुद्रपुर – मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मिले मात्र पाँच हज़ार के आर्थिक सहायता के चैक से रुद्रपुर की राजनीति में तूफ़ान उठा हुआ है। जहां इस मामले में पूर्व विधायक राज कुमार ठुकराल ने प्रेस वार्ता कर विधायक पर आरोप लगाये। लेकिन इसके बाद विधायक शिव अरोरा ने भी आनन फानन में पत्रकार वार्ता बुलाकर न केवल अपनी सफाई पेश की बल्कि आरोप लगाने वाले पूर्व विधायक को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व जनप्रतिनिधि मेरे खिलाफ षड्यंत्र रच कर मुझे और मेरे परिवार के लोगो को बदनाम कर रहे है। जिसे स्वीकार नहीं किया जायेगा, जो भी किरदार इस मामले में है उनकी जांच हो तो असली षड्यंत्र खुल जायेगा।
विधायक शिव अरोरा ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए चैक प्रकरण पर कहा कि कोई भी आर्थिक सहायता का चैक बाटने की तहसील स्तर से बहुत पारदर्शी प्रकिया की जाती है। चैक प्राप्त करने वाले व्यक्ति के बकायदा रजिस्टर मे हस्ताक्षर व सभी जरूरी प्रकिया के बाद चैक सौपा जाता है। ऐसे मे पूर्व जनप्रतिनिधि द्वारा चैक पाने वाले के साथ की गयी प्रेसवार्ता मे लगाये गये आरोप निराधार है। उस व्यक्ति द्वारा चैक न मिलने पर न तो विधायक कार्यालय सम्पर्क किया गया ओर न ही तहसील स्तर चैक प्राप्त न होने की जानकारी दी गयी।

विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष से आज तक हजारों चैक बाटे जा चुके है। आज तक ऐसी घटना सामने नहीं आयी है। यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है। इसकी जांच होने चाहिए साथ हीं रिकॉडिंग मे जो भी लोग बात कर रहे है उसकी भी जांच हो कि किसके इशारे पर चैक पाने वाले ने यह कार्य किया है, यह जांच होने पर साफ होगा।
शिव अरोरा ने कहा कि जो व्यक्ति चैक न मिलने का आरोप लगा रहा है आखिर उसको तहसील से चैक बिना कोई जटिलता के मिल भी जाता। यह सोचने की बात है। विधायक ने कहा कि उनके कार्यकाल मे सभी कार्य बहुत पारदर्शिता से होते आ रहे है। पूर्व जनप्रतिनिधि अपनी दस साल की नकामी छुपाने के लिये आये दिन निराधार आरोप लगाते रहते है। जिनका कोई आधार नहीं होता।
विधायक शिव अरोरा ने कहा कि उनके द्वारा दो साल के कार्यकाल मे किये गये विकास कार्य से वह बौखला गये है। उनके पास अपने कार्यकाल की कोई उपलब्धि गिनाने को कुछ नहीं है। वो अनर्गल आरोप लगाकर चर्चा में बने रहना चाहते है।

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कौन है जावेद जिसका आडिओ वायरल हो रहा है ?
इस पूरे मामले में जो आडिओ वायरल हो रहा है, उसमे साफ़ तौर पर पीड़ित और जावेद नामक किसी व्यक्ति से मोबाइल पर बातचीत हो रही है और वो पांच हज़ार रूपये के चैक पर तीन हज़ार रूपये की रिश्वत मांग रहा है। यहां सवाल यह है कि जावेद ने पीड़ित भगवान दास को फ़ोन क्यों किया ? उसके पास चैक की जानकारी कहा से आई ? भगवान् दास का एक्सीडेंट होने पर उसकी पत्नी ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता के लिये प्रार्थना-पत्र दिया था। जिसके बाद तहसील में आर्थिक सहायता का चैक पहुंचा था। जो अब भगवन दास को मिल भी गया है।
इसी चैक को देने के लिये कथित रिश्वत की मांग की गई थी। पीड़ित भगवन दास और जावेद के बीच हुई बातचीत का आडिओ वायरल हुआ और उसके बाद रानजीतिक आरोप लगने लगे। सच्चाई तो जांच के बाद ही सामने आयेगी, क्यों जावेद ने पीड़ित को फ़ोन किया ? क्या यह कोई षड्यंत्र था ? या सचमुच कोई रिश्वत रैकेट लोगो से ठगी कर रहा है।





















