
– अज़हर मलिककाशीपुर – सरकार बाल श्रम रोकने के कितने उपाय करे ,लेकिन खुलेआम बाल श्रम कानून का मज़ाक बनाया जा रहा है। इसे रोकने वाले अधिकारी अपने दफ्तरों में आराम फरमा रहे है। इस तस्वीर को देखिये किसे दो मासूम किशोर कबाड़ जमा कर रहे है। इनकी उम्र अभी स्कूल जाने की है। लेकिन तकदीर ने इसे बाल श्रमिक बना दिया है।
यह कोई अकेला मामला नहीं है,जिले के काशीपुर में ऐसी तस्वीरें आप को रोज़ दिख जायेंगी,किन्तु इनका स्तर सुधरने की न तो किसी अधिकारी को फुर्सत है और न ही तकदीर तस्वीर बदलने का वादा करने वाले किसी रानजीतिक दल को। अब हालत यह हो गई है कि नगर में ऐसे बच्चो की संख्या में रोज़ इज़ाफ़ा हो रहा है। जो गन्दगी के बीच अपनी जीविका चलाने के लिये कबाड़ इकठ्ठा कर रहे है।
ऐसे ही काशीपुर में बाल श्रम के मामले लगातार सामने आ रहे है। लेकिन जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ताजा मामला काशीपुर में स्थित जीत कॉलोनी का है जहां दो नाबालिग बच्चे रिक्शे पर बड़ा सा बैग रखकर सड़कों से कबाड़ा बीनते हुए दिखाई दिए जिसकी जानकारी महिला बाल किशोर जनजागृति समिति की अध्यक्ष ज्योति अरोरा को मिली तत्काल जानकारी मिलते ही समिति अध्यक्ष ज्योति, पंकज अरोरा ,शाकिर मौके पर पहुंच गए, जहां समिति द्वारा काशीपुर सीओ को सूचना दी और पुलिस की मदद से दोनों बच्चों को काशीपुर कोतवाली लेकर आया गया। जहां उनके मां-बाप को बुलाकर दोनों बच्चों को काम न कराने की सख्त हिदायत दी, साथ उनको पढ़ाने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। योजनाओं के अंतर्गत दोनों बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी समिति द्वारा ली गई है। इस से पूर्व में भी महिला बाल किशोर जनजागृति समिति द्वारा बाल श्रम पर आवाज उठाई गई पूर्व में जसपुर काशीपुर बाजपुर रुद्रपुर बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया।
किशोर जनजागृति समिति की अध्यक्ष ज्योति अरोरा का कहना है कि उनकी समिति ऐसे बच्चो के जीवन सुधरने के लिये एक अभियान चला रही है। उसकी कोशिश है कि बाल श्रमिक शिक्षित होकर देश का नगर का और अपने परिवार का नाम रोशन करे। उन्होंने जो अलख जगाई है उनकी रौशनी से कई परिवारों के नौनिहाल आगे बढ़ेंगे।
भले ही केंद्र सरकार और राज्य सरकार बाल श्रम रोकने के लिए तरह-तरह योजनाएं क्यों ना चलाती हो, लेकिन उन योजनाओं को मजबूर मां बाप तक पहुंचाने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर होती है वह कंधे एयरकंडीशन दफ्तरों में बैठकर ठंडी फिजाओं का मजा लेते हैं और बाल श्रमिक मासूम धूप की तपिश में खुद को झुलसा कर अपनी ज़िन्दगी तबाह कर रहे है। ऐसे मासूमो की ज़िन्दगी सवारना ज़रूरी है यही हमारे भारत का भविष्य है।





















