
– अज़हर मलिककाशीपुर – देश की आजादी के आंदोलन की जहां गाथा लिखी गयी, जहां महात्मा गांधी से लेकर जवाहर लाल नेहरू ने आजादी की अलख जगाई। जिस चुनावी भूमि से गोविन्द बल्लभ पंत और नारायण दत्त तिवारी से दिग्गज नेताओं की राजनीति शुरू हुई, उसी चुनावी रणभूमि में एक बार फिर चुनावी महासंग्राम छिड़ गया है, हम बात कर रहे हैं काशीपुर विधानसभा सीट की जिसका राजनीतिक इतिहास बेहद ही दिलचस्प है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने इस सीट पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर शहज़ादों को टिकट देकर पार्टियों में बगावत चरम पर है, पेश है काशीपुर से एक खास रिपोर्ट :-

देश की आजादी के बाद से ही काशीपुर विधानसभा सीट बेहद ही खास मानी जाती रही है, इसी सीट से नारायण दत्त तिवारी जीत दर्ज कर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर भी रहे हैं। वहीं पिछले पैंतीस सालों से इस सीट पर भाजपा का दबदबा है,जहां बीस सालों से लगातार हरभजन सिंह चीमा जीत दर्ज करते आ रहे हैं, इस बार के चुनावी संग्राम में भाजपा और कांग्रेस ने शहज़ादों को टिकट देकर खुद ही बगावत के काटे बिछा दिये है। कांग्रेस ने जहां पूर्व सांसद और कुमायूं नरेश के सी बाबा के बेटे नरेन्द्र सिंह को टिकट दिया है,वहीं भाजपा ने भी हरभजन सिंह चीमा के बेटे त्रिलोक सिंह चीमा को टिकट देकर पार्टी में एक बडी बगावत खडी कर दी है।

भाजपा और कांग्रेस की अंदरुनी बगावत से आम आदमी पार्टी के अच्छे संकेत मिल रहे है, पहली बार चुनाव लड रही आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी दीपक बाली पर इस बार जनता ज्यादा विश्वास जता रही है। एक साल से चुनावी तैयारी में लगी आम आदमी पार्टी पहले ही अपनी जमीन मजबूत कर चुकी थी, ऐसे में भाजपा और कांग्रेस की टिकट को लेकर खींचतान और कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर ‘शहज़ादों’ पर दांव खेल दोनों ही पार्टियों अपने लिये मुश्किलें कड़ी कर ली है। जिसका फायदा आम आदमी पार्टी को मिलता दिखाई दे रहा है।





















