
– विक्की रस्तोगी
लखनऊ – उत्तरप्रदेश की जेलों में बंदी अनुशासन के लिए प्रिंजेस एक्ट 1894 के प्रावधानों में संशोधन को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। जेल में मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर, और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग अब संज्ञेय व गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आ गया है।
नए प्रावधान में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रयोग पर तीन से पांच वर्ष की सजा और 20 से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। पहले यह सजा अधिकतम 6 महीने की थी और जुर्माना 200 रुपयों का था। डीजी जेल आनंद कुमार ने बताया कि इसका ड्राफ्ट दो वर्ष पूर्व तैयार किया गया था।

सेंट्रल एक्ट होने के कारण इसमें संशोधन के लिए प्रदेश के दोनों सदनों से पास होने के बाद केंद्र से मंजूरी मिलना आवश्यक था। केंद्र अब इस एक्ट को मंजूरी दे दी है। इसके बाद यह कानून प्रदेश में लागू हो गया हैं। गृह विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि नए प्रावधान से अब जेलों में इनके उपयोग पर अंकुश लगेगा।





















