– इंडिया नज़र ब्यूरो बाजपुर – कुमाऊं विश्वविद्यालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत विधि पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत अंतिम सेमेस्टर के छात्रों के लिए 10 दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब प्रशिक्षण पूरा किए बिना छात्रों की डिग्री पूर्ण नहीं मानी जाएगी।
विश्वविद्यालय ने बताया कि एलएलबी त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम के छठे सेमेस्टर तथा बीबीए-एलएलबी पंचवर्षीय पाठ्यक्रम के दसवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों को किसी वरिष्ठ अधिवक्ता के अधीन न्यायालय में यह प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्रों को न्यायालय की कार्यप्रणाली, वकालत के व्यावहारिक पहलुओं और न्यायिक प्रक्रिया की वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराना है।
इस संबंध में सतेन्द्र चंद्र गुड़िया लॉ कॉलेज ने बाजपुर क्षेत्र के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से छात्रों को प्रशिक्षण देने हेतु सहयोग की अपील की है। संस्थान का कहना है कि अनुभवी अधिवक्ताओं का मार्गदर्शन छात्रों के भविष्य निर्माण और व्यावहारिक कानूनी ज्ञान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह व्यवस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया के “Rules of Legal Education 2008” के तहत लागू की गई है। नियमों के मुताबिक प्रत्येक विधि छात्र को अंतिम वर्ष में कोर्ट विजिट, चैंबर विजिट और प्री-ट्रायल तैयारी सहित कुल 12 सप्ताह की इंटर्नशिप करना अनिवार्य होता है। उसी प्रक्रिया के अंतर्गत यह 10 दिवसीय कोर्ट प्रशिक्षण भी आवश्यक किया गया है।
विश्वविद्यालय ने सभी बार एसोसिएशनों और अधिवक्ता संघों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि विद्यार्थियों को समय पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे निर्धारित अवधि में अपना व्यावसायिक प्रशिक्षण पूरा कर सकें और भविष्य में बेहतर अधिवक्ता बन सकें।
विश्वविद्यालय ने बताया कि एलएलबी त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम के छठे सेमेस्टर तथा बीबीए-एलएलबी पंचवर्षीय पाठ्यक्रम के दसवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों को किसी वरिष्ठ अधिवक्ता के अधीन न्यायालय में यह प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्रों को न्यायालय की कार्यप्रणाली, वकालत के व्यावहारिक पहलुओं और न्यायिक प्रक्रिया की वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराना है।
इस संबंध में सतेन्द्र चंद्र गुड़िया लॉ कॉलेज ने बाजपुर क्षेत्र के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से छात्रों को प्रशिक्षण देने हेतु सहयोग की अपील की है। संस्थान का कहना है कि अनुभवी अधिवक्ताओं का मार्गदर्शन छात्रों के भविष्य निर्माण और व्यावहारिक कानूनी ज्ञान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह व्यवस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया के “Rules of Legal Education 2008” के तहत लागू की गई है। नियमों के मुताबिक प्रत्येक विधि छात्र को अंतिम वर्ष में कोर्ट विजिट, चैंबर विजिट और प्री-ट्रायल तैयारी सहित कुल 12 सप्ताह की इंटर्नशिप करना अनिवार्य होता है। उसी प्रक्रिया के अंतर्गत यह 10 दिवसीय कोर्ट प्रशिक्षण भी आवश्यक किया गया है।
विश्वविद्यालय ने सभी बार एसोसिएशनों और अधिवक्ता संघों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि विद्यार्थियों को समय पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे निर्धारित अवधि में अपना व्यावसायिक प्रशिक्षण पूरा कर सकें और भविष्य में बेहतर अधिवक्ता बन सकें।




















